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कृषि और ग्राम विकास प्रभाग के अखिल भारतीय सम्मेलन का ​उद्घाटन

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सद्भावना से होगा सर्व समस्याओं का अंत : डॉक्टर राम खर्चे

​​ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),३० जून २०१७ । आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था ,​​कृषि और ग्राम विकास प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था -“गाँव के सर्वांगीण विकास का आधार -सद्भावना ” . इस सम्मलेन में बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का ​​उद्घाटन सम्पन्न हुआ.

आज के कार्य क्रम की तथा ब्रह्मा कुमारीस ​​कृषि और ग्राम विकास प्रभाग की भी अध्यक्षा राजयोगिनी सरला दीदी (मेहसाणा ) ने कहा कि सद्भावना आज के वातावरण को शुद्ध करने का एक शक्ति शाली शस्त्र है। जहां स्वार्थ है वहाँ सद्भावना नहीं हो सकती है। सद्भावना के लिए मन की विशालता चाहिए। मन की विशालता के लिए आध्यात्मिकता की जरूरत होगी। आध्यात्मिकता के आधार पर ही हम मन में सर्व के लिए सद्भावना भर सकेंगे। पूरी दुनिया के लिए मन में सद्भावना रखने से धरती माता धन्य होंगी और संसार को धन धान्य से परिपूर्ण कर देगी। आत्मा के ज्ञान से सारे किसान जागृति को प्राप्त करेंगे। परमात्मा से खुद को योग युक्त करके किसान ईश्वर से सर्व शक्तियां प्राप्त प्राप्त करेंगे और विश्व में सद्भावन प्रेषित कर पाएंगे।

भ्राता डॉक्टर राम खर्चे पूना कृषि संस्थान के चेयरमैन , ने मुख्य अतिथि के तौर पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। आपने कहा कि मैं मानता हूँ की सद्भावना से सभी कुछ संभव है। जैसे अपने बच्चे के लिए प्राकृतिक रूप से सद्भावना बनी रहती है वैसी ही सद्भावना सर्व के लिए होनी चाहिए। मगर वह कैसे संभव है ? यहां हम वही कुछ सीखेंगे। सद्भावना के अभाव में ही हम हर वर्ष काफी बड़े पैमाने पर बायो मास को नष्ट कर देते हैं – जला देते हैं। जबकि हम उनको कम्पोस्ट के रूप में प्रयोग में ला सकते हैं। हमने प्रकृति के प्रति काफी निर्दयता दिखाई है। सद्भावन सीख कर हम अरबों -खरबों रुपयों की संपत्ति को जलने से बचा सकेंगे। योगिक खेती अर्थात सद्भावना से करिश्मा हो सकता है। हमें सभी के लिए सद्भावना प्रकट करनी होगी। प्रकृति के स्नेह और आदर रखने से जीवन पलट जाएगा। इस पर विशेष ख़याल रखना होगा।

भ्राता जय प्रकाश उप निदेशक ,पूसा कृषि शोध संस्थान ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपना वक्तवय प्रस्तुत किया। आपने सद्भावना की बात को वैज्ञानिक स्वरुप प्रदान करके जन जन तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया। मैंने यहां से सीखा की सन्तुष्टता कैसे जीवन में प्राप्त की जा सकती है। कोई पी एच डी करने की जरूरत नहीं इसके लिए। यह यहां की विशेषता है। सद्भावना से संसार बदल सकता है। आध्यात्मिकता हमें सब कुछ सिखा देगी। ब्रह्मा कुमारीस से हम आध्यात्मिकता सीख कर सद्भावना अपने जीवन में अपना सकेंगे।

पूर्व कृषि मंत्री , उत्तर प्रदेश शासन श्रीमान प्रदीप यादव जी ने कहा कि यहां का वातावरण बहुत सुन्दर है और मैं जीवन में पहली बार इतना प्रसन्न हुआ हूँ। सत्य पर चलने से सारी समस्यायों का अंत हो जाता है। हमारे किसान विपरीत परिस्थितिओं को समझते हैं और उनसे बचना भी जानते हैं। अब सिर्फ सद्भावना अपने जीवन में अपना कर दुनिया सुखमय बनाने में अपना योगदान देते रहे।

​​कृषि और ग्राम विकास प्रभाग की ​रास्ट्रीय संयोजिका ​राजयोगिनी तृप्ति बहन ने मुख्य ​वक्ता के रूप में अपने उदगार व्यक्त किये। आपने कहा कि आज इस विश्व में सद्भावना की अनिवार्यता है। आपने लोकमान्य तिलक के हवाले से बताया की अगर भारत को जगाना है तो पहले भारत के गावों को जगाना होगा। आज की तारीख में भी यह उतना ही सत्य है जितना की तब था। आगे आपने कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए सद्भावना अपनाना ही होगा। सद्भावना अर्थात निःस्वार्थ भाव से सर्व के प्रति शुभ भावना , शुभ कामना रखना। तृप्ति बहन ने एक समाज सेवी का संस्मरण सुनाया जो विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित बच गया ,जब की उसके साथ के अन्य ५४ यात्री दुर्घटना में मारे गए। वह व्यक्ति दुवाओं की वजह से जीवित रहा। सद्भावना से सभी को मिलेगी दुवायें।