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Daily Archives: Aug 3, 2017

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सुखी रहना है तो दूसरों को सुख देकर उनकी दुआएँ लो… ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी

रा​​यपुर, २६ जुलाई: आस्था और संस्कार चैनल पर प्रतिदिन प्रसारित होने वाले कार्यक्रम अवेकनिंग विथ ब्रह्माकुमारीज की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने कहा कि जीवन को सुखी बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाओ। कभी किसी को दु:ख मत दो। जितना दूसरों को सुख देंगे उतना बदले में दुआएं मिलेंगी और आपका जीवन स्वत: ही सुखमय बन जाएगा।
ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स स्थित इन्डोर स्टेडियम में आयोजित आध्यात्मिक समागम कार्यक्रम में विशाल जन समुदाय को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि सारे दिन में हम जिनके भी सम्पर्क में आते हैं, उनके साथ हमारा कार्मिक एकाउण्ट बनता है। अगर सारा दिन हम दूसरों को दु:ख देंगे तो हम स्वयं कैसे सुखी रह सकते हैं? जो कर्म करते हैं, उनका फल किसी न किसी रूप में हमें ही भोगना पडता है।

पुरानी बातों को मन में न रखें, उसे भूल जाएं:
उन्होंने नया रायपुर का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ सडक़ें और मकान बनाने से नया रायपुर नहीं बनेगा बल्कि अपनी सोच और संस्कार को भी नया बनाना होगा। उन्होंने मनुष्य के जन्मजात संस्कारों की चर्चा करते हुए बतलाया कि मनुष्य स्वभाव से ही सफाई पसन्द होता है। घर में कहीं पर गन्दगी हो तो उसे तुरन्त साफ करते हैं। कचरे को ज्यादा दिन रखेंगे तो कीड़े पनपेंगे, बदबू आएगी। इसलिए उसे जल्दी बाहर फेंकने की कोशिश करते हैं। इसी प्रकार हमारे मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना, ईष्या अथवा द्वेष आदि न हो। यह सब गन्दगी हैं जो कि हमें बीमार कर देंगे। इन्हें बाहर फेंक दें यानि भुला दें। मन में न रखें। जीवन में खुश रहना सीखें।
उन्होंने बतलाया कि कई लोग स्वयं को बदलने की बजाय दूसरों को बदलने में लगे रहते हैं। कमोवेश यह हम सभी की आदत सी हो गई है। समझदारी इसी में है कि हम अपने कर्मों को दूसरों के लिए सुखकारी बनाएँ, जो हमारे नियंत्रण में भी होता है। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों से प्रतिज्ञा करवायी कि जो संस्कार हमें या दूसरों को दु:खी करते हैं, उसे आज से बदलने का पुरूषार्थ करना है। यही जीवन को सुखद बनाने की पहली सीढ़ी है। हम दूसरों से अपेक्षाएँ बहुत करते हैं लेकिन स्वयं के कर्मों पर अटेन्शन नहीं रख पाते।

विचारों से बनता है -वातावरण:
उन्होंने बतलाया कि हमारे विचारों से वायुमण्डल बनता है। हमारी हर सोच दूसरों तक पहुँचती है। घर का वातावरण घर में रहने वाले लोगों के सोच से बनता है। मन्दिर का वातावरण इसीलिए इतना शान्त और पवित्र होता है, क्योंकि वहाँ पर लोग शुद्घ और पवित्र विचारों के साथ जाते हैं। हम सब जानते है कि जैसा कर्म वैसा फल मिलता है। इसलिए आप अपने लिए जो चाहते हैं, वही दूसरों को दें। इससे जीव श्रेष्ठ बन जाएगा। हमें जीवन में खुशी और शान्ति चाहिए तो इसे दूसरों को देना सीखें। हमारे मन में सबके लिए अच्छे और शुभ विचार होने चाहिए।

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आबू रोड, 29 जुलाई, निसं। आज तेजी से सड़क में दुर्घटनाओं में तेजी से इजाफा हो रहा है। परन्तु देखने में यही आया है कि जीवन में तनाव और उलझन ही दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है। दूसरा सबसे बड़ी वजह नशा है। इसलिए दुर्घटनाओं को रोकना है तो जीवन को संतुलित बनाना होगा। उक्त उदगार एनएआईआर के महानिदेशक राजीव गुप्ता ने व्यक्त किये। वे ब्रह्माकुमारीज संस्था के मनमोहिनीवन स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में यातायात एवं परिवहन प्रभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए आयेाजित सम्मेलन में व्यक्त कर रहे थे।

उन्होनें कहा कि सड़क हो या रेलवे हर जगह स्वस्थ संतुलन की अति आवश्यकता है। तनाव और नशे का सेवन सड़क दुर्घटना का प्रमुख कारण है। जल्दीबाजी और असंतुलित मानसिक स्थिति ऐसे स्थितियों को आमंत्रित करती है। मनुष्य को जीवन की यात्रा में भी सही सोच एवं व्यवहार की जरूरत है। राजयोग और आध्यात्मिक ज्ञान ऐसी स्थितियों में मददगार साबित हो सकता है।

यातायात एवं परिवहन प्रभाग की उपाध्यक्षा बीक दिव्यप्रभा ने कहा कि हमारा प्रयास है कि बढ़ते हुए दुर्घटनाओं को रोका जाये। ऐसा देखने में आया है कि जब व्यक्ति उलझन में होता है तब उसकी एकाग्रता भंग होती है। और वही दुर्घटन कारण बनती है। इसलिए राजयोग के जरिये मन को संतुलित रखना जरूरी है।

नार्दन रेलवे के सीपीओ अंगराज मोहन ने कहा कि राजयोग और ध्यान ही एक ऐसा माध्यम जिससे इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। इसलिए सरकार भी इसके लिए एक मुहिम चलानी चाहिए।

ज्ञान सरोवर की निदेशिका डा निर्मला ने कहा कि सड़क दुर्घटना से ज्यादा जीवन में दुर्घटना है जिससे व्यक्ति हमेशा के लिए आहत हो जाता है। ऐसी स्थितियां ही समाज को बिगाड़ रही है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि राजयोग से ही सम्भव है।