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Daily Archives: Oct 2, 2017

ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा चैतन्य देवियों की झांकी

शिव की शक्तियों की आरधना का पर्व नवरात्रि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी धूम धाम से पूरे भोपाल में मनाया जा रहा हैए भोपाल की प्रमुख मार्केट्स और मुख्य चौराहों पर विशाल आकार के पंडालों से सजा हुआ पूरा शहर इस उत्सव में मगन हैए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन भी किये जा रहे हैंए इन्ही भव्य पंडालों के बीच और शहर के मुख्य मंदिरों के अलावा भोपाल शहर एक झांकी ऐसी भी है जिसकी चर्चा हर देवी भक्त और हर व्यक्ति की जुबान पर हैण् इस झांकी को देखने वाले श्रद्धालु जन एकटकी लगाये इस झांकी को देखते ही रह जाते हैं.यह झांकी हैए प्रजा पिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालयए शाखा रिवेरा टाउनशिप द्वारा आयोजित श् चैतन्य देवियों की झांकी. प्लैटिनम प्लाजा ए माता मंदिर पर सजी यह झांकी अन्य झांकियों से अलग इसीलिए भी है कि इस स्थान पर किसी मूर्तिकार द्वारा निर्माण की हुई देवी माता की जड़ मूर्ति नहीं हैए बल्कि यहाँ पर ब्रह्माकुमारीज़ में प्रतिदिन आने वाली कन्यायें जो नियमित रूप से ज्ञान और योग ; ईश्वर की याद का अभ्यास करती हैंए वह कन्यायें माँ शक्ति के विभिन्न स्वरूपों को धारण कर विराजमान हैंए देखने में लगता है कि यह जड़ मूर्तियां ही तो हैं, परन्तु दर्शन करने वाले भक्तों को जब यह बताया जाता है कि यह साक्षात कन्यायें हैंए जो परमपिता परमात्मा शिव का ध्यान कर रही हैंए तपस्या में बैठी हैंए तब विस्मित हो सभी श्रद्धालु अपलक देवी माँ के इन स्वरूपों को निहारते ही रह जाते हैं.
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इस अवसर पर मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान जी ने शिरकत किए. इस अवसर पर मुख्यमंत्रीजी ने संस्था को बधाई देते हुए कहा कि यह चेतन्य देवियों कि झांकी समाज में नारी के उत्थान व शशक्तिकरण के लिए एक सराहनी कार्य कर रही हैं. ब्रह्माकुमारीज रिवेरा टाउनशिप सेवा केंद्र की इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी तृष्णा बहन ने बताया कि हर धार्मिक पर्व एक ईश्वरीय सन्देश लेकर आता हैए हर उत्सव हम सभी मनुष्य आत्माओं को ईश्वर के और अधिक निकट जाने का अवसर देता है.नवरात्रि की यह झांकियां भी इसीलिए सजाई जाती हैंए कि हर नर.नारी स्वयं के अंदर झांक कर देख सकेए कि क्या मैं देवी माँ का बेटा या बेटी कहलाने योग्य कर्म कर रहा हूँ. यदि नहीं तो मुझे अपने जीवन को आध्यात्मिक मूल्यों के आधार से ऐसा बना होगा कि श्रेष्ठ कर्मों से श्रेष्ठ जीवन का निर्माण हो.