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Art & Culture Conference at Mount Abu

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जीवन को सात्विक बनाती है आध्यात्मिकता ज्ञान सरोवर में कला, संस्कृति सम्मेलन आरंभ

माउंट आबू, १७ जून। पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय प्रिय ने कहा है कि आध्यात्मिकता जीवन को सात्विक बनाती है। प्राचीन भारतीय संस्कृति को बचाने की जरूरत है। इस भगीरथ कार्य में कलाकार अपना कला की ताकत का सदुपयोग कर सकते हैं। जो कला के माध्यम से समाज को नई दिशा दिखा सकते हैं। वे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कला और संस्कृति प्रभाग के तत्वाधान में आयोजित सम्मलेन के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

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उन्होंने कहा कि हमारा संविधान पूरी तरह आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत है। हमारे पूर्वज भी इन बातों के आधार पर ही जीवन व्यतीत करते थे। आध्यात्मिकता को अपनाने से जीवन सफल हो जाता है। ब्रह्माकुमारीज की ओर से प्रशिक्षित राजयोग की शिक्षाएं पूरी तरह आध्यात्मिक हैं जिनसे मुझे गहरी प्रेरणा मिली है। इससे हमारा आतंरिक विकास होता है।

ज्ञान सरोवर की निदेशिका राजयोगिनी डॉक्टर निर्मला दीदी ने कहा कि आत्मा और परमात्मा को सही रीति से जान लेने के बाद हमारी दृष्टि व वृत्ति सकारात्मक हो जाती है। जीवन में भाईचारे की भावनाओं का समावेश होता है। मनसा-वाचा-कर्मणा आध्यात्मिक शक्तियां जीवनशैली को अलौकिक बना देती हैं।

ओ माय गॉड सहित अनेक प्रसिद्ध फिल्मों के निर्देशक, फिल्म निर्देशक उमेश शुक्ल ने कहा की कोई भी कार्य अगर ईश्वर की याद में किया जाए तो उसमे काफी सफलता प्राप्त होती है। यहां आकर आज मैं यह दावा कर सकता हूँ कि मेरे मन में जो काँटा लगा हुआ था वह अब निकल गया है। यह एक अद्भुत स्थल है जहां ईश्वर की कृपा बरस रही है।

ब्रह्माकुमारी संगठन के कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय ने कहा कि कलाकार अपनी कला के माध्यम से जीवन को संगीतमय बनाने में सक्षम होते हैं। जीवन में दिव्यता , पवित्रता, शांति और प्रेम भर जाए तो इस दुनिया को कलाकार आसानी से स्वर्ग बना सकेंगे। राजयोग के अभ्यास से मन की शक्तियां जागृत होती हैं। जिससे आपकी सोच की दिशा परिवर्तित व सार्थक बनेगी।

मुंबई से आए फिल्म निर्देशक प्रेम राज ने कहा कि ईश्वर की कृपा से ही विश्व परिवर्तन के कार्य को लेकर इतने लोगज्ञान सरोवर में परिसर में एकत्रित हुए हैं। उन्होंने अपने जीवन का अनुभव सुनाते हुए कहा कि राजयोग से मैं अवसाद से बाहर निकला हंू। आत्म हत्या जैसे विचारों से मुक्ति प्राप्त की। प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके सतीश ने कहा कि आध्यात्मिकता से विहीन समाज अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह पायेगा। जब राष्ट्र्र की संस्कृति पर चोट होती है तो वह राष्ट्र भी समाप्त हो जाता है।