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मन को काबू करके ही खुद पर किया जा सकता है शासन – बागड़े
प्रशासकों का सम्मेलन सत्र शुरू, दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ

आबूरोड़ 18 नवम्बर निसं। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के राजयोगा एज्यूकेशन एवं रिसर्च फाउंडेशन के प्रशासक सेवा प्रभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि विधान सभा के स्पीकर हरिभाउ बागड़े ने कहा कि निरंतर राजयेाग के अभ्यास से मन को काबू किया जा सकता है। इसके पश्चात ही हम खुद पर शासन करना सीख जायेंगे। योग, ध्यान-धारणा और एकाग्रता से ही मन को सुधारा जा सकता है। वे प्रशासकों के लिए आयोजित सम्मेलन में देशभर से आये प्रशासकों, प्रबन्धकों एवं कर्मचारियों को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि चाहे प्रशासक हो, प्रबन्धक हो या कर्मचारी जब किसी से गलती हो जाये तो उसके बन्दर वेचैनी बढऩी चाहिए। इससे ही उसे सुधारने की शक्ति मिलेगी। स्वयं के मन को नियंत्रित करके स्वयं पर शासन करने से ही बेहतर प्रशासन हो सकता है। छत्रपति शिवाजी के सुशासन व्यवस्था को याद दिलाते हुए आगे कहा कि जो व्यक्ति अपने कर्म, बर्ताव को अच्छे ढंग से लोगों के हित के लिए कार्य करता है। वे नैसर्गिक न्याय के रूप में कार्य करता है। स्वयं शासन अनुशासन से कारोबार चलता है। गलती से अगर गलत व्यवहार हुआ तो सुधार लीजिए। कहना, करना और बोलना सुशासन है। पर प्रशासन सुशासन में लोगों का अधिक से अधिक कल्याण करना ही कुशल प्रशासन है।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के महासचिव बीके निर्वैर ने कहा कि जो सच्चाई, नि:स्वार्थ और ईमानदारी से काम करते हैं वे जनता के बहुत प्रिय बन जाते हैं। और जिन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य जन-जन की सेवा में लगा दिया, अपने संकल्प, श्वास और समय विश्व कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। वहीं बेहतर प्रशासन है। प्रशासन में साफ-सुथरे चरित्र की आवश्यकता है। भारतीय इतिहास की महान विभूतियों में आध्यामिकता कूट-कूट कर भरी हुई थी। जहाँ उमंग है वहाँ सहयोग है।
उड़ीसा के पूर्व मुख्य सचिव तरूण कांति मिश्रा ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि हमें सरकार व जनता के बीच सामंजस्य बनाकर कार्य करना चाहिए। ओम् शांति रिट्रट सेंटर व प्रशासन प्रभाग की डायरेक्टर व चेयरपरसन बीके आशा ने कहा कि मुझे क्या करना है? मेरा जनता के साथ इंटरऐक्शन कैसा है? अगर इन दो बातों पर ध्यान दें तो एक अकेला व्यक्ति अपने जीवन में बहुत कुछ कर सकता है। लेकिन इसके लिए उसे अपने जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को शामिल करना होगा।

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अच्छे समाज निर्माण के लिए जरूरी है जीवन में मानवीय मूल्य और अध्यात्म- सत्येन्द्र जैन
राजयोग का अभ्यास से होता है सदगुणों का विकास – दादी

आबूरोड़ 28 अक्टूबर, निसं। मूल्य और आध्यात्म को अगर हम जीवन में धारण करें तो ही सुख, शांति और स्वथ्य रह सकते हैं। यदि अच्छा समाज बनाना है तो उसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में नैतिक मूल्य और अध्यात्म अपनाने की जरूरत है। यह बात ब्रह्माकुमारीज संस्थान शांतिवन परिसर में समाज सेवा प्रभाग द्वारा आयोजित सम्मेलन में दिल्ली से आये स्वाथ्य मंत्री श्री सत्येन्द्र जैन ने व्यक्त किये।

आगे उन्होंने कहा कि अपने मन को अगर हम दूसरो के लिए समर्पित करेगें तो ही हमारे जीवन में मूल्य और आध्यात्म आ सकता है। मूल्य और आध्यात्म से ही हम स्वथ्य और सुन्दर जीवन जी सकते हैं। आज हर किसी को मूल्य शिक्षा की आवश्यकता है। मूल्य और आध्यात्म की शिक्षा का सच्चा ज्ञान हमें ब्रह्माकुमारीज संस्था पूरे पूरे विश्व में फैला रही है। चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज सेवा का भी रूप बदल गया है लोग कहीं ना कहीं स्वार्थवश भी सेवा का नाम दे देते है। इन चीजों से बचने की जरूरत है।

ब्रह्माकुमारीज संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा की स्वयं की पहचान से ही समाज में आपसी सौहार्द्र और भाईचारा बढ़ेगा। क्योकि बिना आपसी सौहाद्र के अच्छे समाज का निर्माण मुश्किल है। इसके लिए खुद को परमात्मा से जोड़े तो परमात्मा पिता के सारे ज्ञान, गुण और विशेषताएँ स्वयं में आने लगेगी।

महाराष्ट्र के पूर्व वित्तमंत्री हर्ष वर्धन पाटिल ने कहा कि आज समाज में मूल्यनिष्ठ शिक्षा और आध्यात्म की कमी से आज हर कोई में बुराईयाँ और तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण आज मनुष्य में लालच, ईष्र्या, क्रोध जैसी बुराईयाँ उत्पन्न हो रही है। जिसको सिर्फ आध्यामिक ज्ञान के द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है। हम सभी मूल्यों को अपने जीवन में धारण करगें तो एक बेहतर भविष्य बना सकते है।

ब्रह्माकुमारीज संस्था के महासचिव बीके निर्वेर ने लोगों से अपील की कि किसी भी हालत में समाज की व्यवस्था को बिगडऩे ना दें। सभी को मिलकर युवा पीढ़ी को संस्कारित करने और एक मूल्यनिष्ठ समाज के बारे में विचार करना चाहिए। परमात्मा का अवतरण ही इस महान कार्य के लिए हुआ है। समाज के लोग हमें देख कर स्वयं ही धारण करने लगेंगे।

नेपाल से आये नेपालीज आर्मी इंस्टीट्युट के वाइस प्रीन्सीपल डॉ. तारा मन अमात्य ने कहा कि आज विश्व में नकारात्मक उर्जा इतनी तेजी से फैल रही है कि लोगों में मूल्यों की धारणा नहीं हो पा रही है। स्पिरिचुअलिटी से ही समाज में मूल्यों की धारणा हो सकती है।

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आबू रोड, 10 अक्टूबर,   पर्यावरण की दृष्टि से इको फ्रेन्डली, बेहतरीन इलीवेशन, पानी, बिजली के सुरक्षित ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा निर्मित मनमोहिनी वन तथा आनन्द सरोवर को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउन्सिल की ओर से ग्रीन बिल्डिंग का सम्मान मिला है। यह अवार्ड जयपुर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में दिया गया। इस अवार्ड के लिए ब्रह्माकुमारीज संस्था के मुख्य अभियन्ता बीके भरत को दिया।
ब्रह्माकुमारीज संस्था का मनमोहिनीवन तथा आनन्द सरोवर परिसर में करीब पांच हजार से भी ज्यादा पौधे तथा फल फूल वाले वृक्ष लगाये गये हैं। इसके साथ ही बाग बगीचे, पानी, निकास  तथा बिजली एवं फायर सेफ्टी की बेहतरीन व्यवस्था है। सात हजार आवासीय इस बिल्डिंग का निर्माण पांच वर्ष पूर्व हुआ था। ब्रह्माकुमारीज पहला आध्यात्मिक संस्थान है जिसके द्वारा निर्मित दो भवनों को इस अवार्ड से नवाजा गया है। 
यह अवार्ड इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउन्सिल के अध्यक्ष वी सुरेश, इंडियन ग्रीन बिल्डिंग रेसिडेन्सियल सोसायटी के उपाध्यक्ष माला सिंह, आईबीसी जयपुर के अध्यक्ष जैमिनी ओबेराय तथा उपाध्यक्ष आनन्द मिश्रा ने बड़े समारोह में यह अवार्ड प्रदान किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान लगातार इस क्षेत्र में कार्य करता रहेगा। जिससे पर्यावरण की रक्षा की जा सके। 
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 1st Oct. 2017, International Senior Citizen Day was celebrated at Gyan Mansarovar, Panipat from 10 a.m to 1 p.m.  About 1000 Senior Citizen participated in this program.
             Mr. Nayab Saini, Labour Minister Haryana was Chief Guest who appealed to respect the seniors in society.
             Dr. Mahesh, M.B.B.S, Post Graduate Diploma in Geriatric Medicine, G.V Modi Hospital, Shantivan was the keynote speaker who explained very well all problems of senior citizens  & their respective solution.
            In the beginning, the Group of girls welcomed all the guests with Haryanvi  Dance.
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            B.k Bharat Bhushan, Director Gyan Mansarovar, Panipat explained the activities being done at Gyan Mansarovar & inspired all senior citizens with words of wisdom.
             B.k Sarla Didi, Circle Incharge, Panipat conducted Meditation & expressed blessings.

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कुरुक्षेत्र ,विश्व शान्ति धाम में रविवार को “शाश्वत यौगिक खेती “का कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानो को सशक्त बनाना है…इस कार्यक्रम में 600 से ज्यादा किसानो ने शाश्वत यौगिक खेती और जैविक खेती के बारे में जाना हमें रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप –प्रज्ज्वलन से किया. जिसमे माउंट से पधारे राजयोगी भ्राता राजेंदर प्रसाद  जी,   मुख्य अतिथि ‘माननीय आचार्य देवव्रत जी   (महामहिम राज्यपाल ,हिमाचल प्रदेश) ,राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राज बहन जी (सब जोन इन्चार्ज,अमृतसर),डा.वजीर सिंह (कृषि  विशेषज्ञ,कुरुक्षेत्र),डा. हरिओम (संयोजक –कृषि विशेषज्ञ),राजयोगिनी सरोज दीदीजी, बी.के.सुदर्शन उपस्थित थे.

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मुख्य अतिथि ‘माननीय आचार्य देवव्रत जी (महामहिम राज्यपाल ,हिमाचल प्रदेश) – ने अपने वक्तव्य कहा कि जीरो बजट प्राकृतिक कृषि के प्रति जागरूक होने से ही किसानो को आर्थिक लाभ मिलेगा इससे पर्यावरण और जल प्रदूषण कम होने के साथ-साथ भूमि की   पीढ़ी को उर्वरा जमीन देने तथा स्वस्थ समाज कीरचना के लिए हमे शून्य लागत प्राकृतिक कृषि को अपनाना चाहिए देसी नसल की गाय का पालन कर एक एक गाय  से 30 एकड़  जमीन में कृषि की जा सकती है.

रविवार को ब्रह्माकुमारी  कुरुक्षेत्र “विश्व शान्ति धाम “ प्राकृतिक एव शाश्वत यौगिक खेती  विषयक सेमीनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे जीरो बजट का  वर्णन लरते हुए बताया की जीरो बजट में बहर से कुछ भी नही खरीदना होता उन्होंने शाश्वत यौगिक खेती के क्षेत्र में ब्र्हमाकुमारी के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों कि भी मुक्तकंठ से सराहना की.

राजयोगी भ्राता राजेंदर प्रसाद (राजू भाई)  ( माउंट आबू राजस्थान)-  से पधारे  मुख्य वक्ता के रूप में अपने वक्तव्य में “शाश्वत यौगिक खेती “ के बारे में बताया की. वर्तमान में  अनेक रसायनों व कीटनाशको के प्रयोग से धरती माँ कि शक्ति समाप्त होती जा रही है उससे उत्पन्न होने वाले फल –सब्जियों व अन्न स्वास्थ्य के लिय हानिकारक  है ऐसे समय में  ब्रह्माकुमारी के ग्राम विकास प्रभाग (विंग ) के माध्यम वर्ष 2007 में न्य प्रोजेक्ट बनाया गया जिसका नाम शाश्वत यौगिक खेती “कुछ दिन पूर्व भारत के कृषि मंत्री दिल्ली विज्ञानं भवन में किसानो व वैज्ञानिको कि पुरे देश में शाश्वत यौगिक खेती के लिए अभियान चलाने को कहा जिससे किशन सशक्त बनेगा और साथ के साथ बताया कि हमे राजयोग का अभ्यास करना चाहिएं जिससे हमारे विचार शुद्ध होते है.

राजयोगिनी राज बहन जी(अमृतसर)-सभी अतिथियों व सभी के प्रति शुभ कामनाए दी खा कि अन्न का हमारे मन पर बहुत गहरा असर पड़ता है अदि हम सात्विक  अन्न का ग्रहण करेगे ,तो हममे सतोगुण कि वृद्धि होगी हमारे पूर्वज प्रकृति कि पूजा किया करते उस समय प्रकृति सतो प्रधान होती थी पुरुष ,प्रकृति और परमात्मा के खेल में पुरुष परमात्मा से शक्ति ले कर प्रकृति को सतोप्रधान बना सकता है.

डा.वजीर सिंह (कृषि  विशेषज्ञ,कुरुक्षेत्र),-ने कहा कि हम जो खा रहे ,वह जहरयुक्त है हमें जौविक खेती  को अपनाना होगा और साथ के राजयोग के अभ्यास से अपने मन को शुद्ध बनाना होगा.

डा. हरिओम (संयोजक –कृषि विशेषज्ञ), की गुरुकुल कुरुक्षेत्र में जो पद्दति अपनाई जा रही है अध्तायात्मिकता को अपनाना  जरूरी है बिना अध्यात्म के हमारे विचार शुद्ध नहीं हो सकते है.

ब्रह्माकुमारी विश्व शान्ति धाम कुरुक्षेत्र कि प्रभारी  राजयोगिनी सरोज दीदी जी ने संस्था की गतिविधियों का विवरण किया. बी.के .हरबंस सिंह ने अजोला ने सभी मेहमानों व किसानो का धन्यवाद  किया.

बी.के .सुदर्शन ने मंच संचालन किया. कुरुक्षेत्र ,विश्व शान्ति धाम में रविवार को “शाश्वत यौगिक खेती “का कार्यक्रम आयोजित किया गया  कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप –प्रज्ज्वलन से किया जिसमे माउंट से पधारे राजयोगी भ्राता राजेंदर प्रसाद  जी, मुख्य अतिथि ‘माननीय आचार्य देवव्रत जी   (महामहिम राज्यपाल हिमाचल प्रदेश) राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राज बहन जी (सब जोनइन्चार्ज,अमृतसर),डा.वजीर सिंह (कृषि  विशेषज्ञ,कुरुक्षेत्र),डा. हरिओम(संयोजक –कृषि विशेषज्ञ),राजयोगिनी सरोज दीदीजी,बी.के.सुदर्शन उपस्थित थे.

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नवरात्रि में बुराईयों का भी करें व्रत – बीके शिवानी
जीवन प्रबन्धन का मंत्र सुनने उमड़ा लोगों का सैलाब
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सिरोही, 22 सितम्बर, निसं। जीवन प्रबन्धन विशेषज्ञ बीके शिवानी को शुक्रवार को सिरोही शहर में थी। ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा आयोजित चैतन्य देवियों की झांकी की संध्या पर जीवन प्रबन्धन पर खण्डेलवाल छात्रावास में उनका व्याख्यान हुआ। उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक चले व्याख्यान में नवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्यों के साथ व्रत की परिभाषा बताते हुए कहा कि हम केवल बाहरी तौर पर पूजा, अर्चना और व्रत करते है। परन्तु आन्तरिक तौर पर ना तो व्रत करते है और ना सशक्त बनाने का  प्रयास करते है। इसलिए इस बार नवरात्रि में बुराईयों का भी व्रत करने का संकल्प लें। इससे ही हमारे अन्दर शक्तियों का वास होगा।

उन्होने लोगांे से बातचीत के लहजे में कहा कि हम अन्दर से इतना कमजोर हो गये है कि अपने जीवन की बागडोर दूसरों के हाथ में दे दिये है। जब परिस्थिति खुशी के रुप में होती है तो खुश हो जाते है और जब विपरित होती है तो दुखी होते है।  इसलिए हम अन्दर से इतना मजबूत बने कि हम से परिस्थितियां बने और बिगड़े। नये कपड़े और नये गाड़ी के साथ नये प्रतिदिन नये संकल्पों को भी करने का प्रयास संकल्प लें। इससे ही हमारा नवरात्रि सफल होगा।
कार्यक्रम में विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि हम चाहते है कि दूसरे हमारे मुताबिक चले परन्तु जब हमारा म नही हमारे मुताबिक नहीं चलता है तो दूसरा हमारा कहना क्यों मानेगा। इसलिए राजयोग के जरिये मन को अपने वश में करें इससे ही हम दूसरों केा साथ लेकर चल सकेंगे। उन्होंने लोगों से संकल्प कराया कि एक सप्ताह तक गुस्सा नहीं करेंगे। यही नवरात्रि की सही मायने में सार्थक होगी।
इस अवसर पर जिला प्रमुख पायल परसराम पुरिया ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि इस सिरोही में शिवानी बहन का आगमन हुआ है। यदि हम लोग उनके विचारों का पांच प्रतिशत भी जीवन में उतारने का प्रयास करें तो जीवन सफल हो जायेगा।
 
फीता काटकर मेले का उदघाटनः सात दिनों तक चलने वाले इस

नवरात्रि मेले का आये अतिथियों ने फीता काटकर उदघाटन किया। इस मेले में नशामुक्ति, बेटी बचाओ, बिजली बचाओ, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण सुरक्षा, गा्रम विकास, जल स्वावलंबन समेत कई विषयों पर आध्यात्मिक प्रदर्शनी लगायी गयी है।
शुरु हो गयी चैतन्य देवियों की झांकीः खंडेलवाल धर्मशाला में लगी चैतन्य देवियों की झांकी ब्रह्माकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी, बीके शिवानी, बीके करुणा, बीके भरत, बीके भूपाल, बीजेपी जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चैधरी, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री विरेन्द्र सिंह चैहान समेत कई लोगों के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में दादी जानकी ने कहा जीवन में पांच बुराईयों को छोड़ने का संकल्प लें और मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें। इससे ही हमारा विकास होगा। हम यदि सचमुच देवियों की झांकी करना चाहते है तो उनके गुणों को जीवन में अपनाये।

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All India Senior Secondary Teachers’ Conference

on “Spiritual Education for Happy and Peaceful Life”

The Reception-cum-Inauguration Session of the All India Senior Secondary Teachers’ Conference on “Spiritual Education for Happy and Peaceful Life” commenced with the candle lighting ceremony in Diamond Hall of Brahma Kumaris’ Shantivan Campus on September 22, 2017 at 6.00 p.m. with all the ceremonial spirit and participation of 8,000 teachers from all over India and Nepal.

The Conference commenced by welcoming guests and speakers on the dais with presentation of badges and bouquets, along with a song performance the Madhur Vani group, with a dance performance by Divine Angel group and also a welcome speech.

In his welcome speech, Dr. B.K. Harish Shukla, National Co-ordinator, Education Wing, Rajayoga Education & Research Foundation (RERF) welcomed all the guests and speakers on the dais and other participating delegates off the dais, and wished their happy and comfortable stay inside the Shantivan Campus. He stated, “With the power of wealth and physique no country can become great, but the power of character can make it so. Spiritual education is highly necessary for peace and happiness. If the teachers can take interest in meditation, spirituality and become self-realized, they can inculcate values in themselves and help in introducing them in the life of the students.” He also added, “A common teacher simply teaches. An average teacher explains and demonstrates. A great teacher inspires. But, the greatest teacher enlightens.”

Dr. B.K Pandiamani, Director, Value Education Programme, detailed about the various Value Education & Spirituality courses and said that these courses are now being offered to 23,000 students in 11 languages through 13 universities (12 Indian and one foreign), and will go a long way in establishing a value-based society in the long run.

B.K. Mruthyunjaya, Vice Chairperson, Education Wing, quoting Dr. S. Radhakrishnan, said, “The destiny of the nation is built in classrooms. Teachers are behind the efforts to make India a Digital India, New India and Divine India. The aim of education is not only to provide jobs to the youth but also to make them divine, fearless and messengers of peace. There are many technical, medical, agricultural universities in which education has become commercialized, but there is only one Brhama Kumaris Spiritual University in the whole world, established by Incorporeal God Father Shiva and Prajapita Brahma, and its holistic Value & Spiritual Education opens the third eye of knowledge and empowers the students with soul power, and thereby will make India again the Vishwa Guru.”

Prof. (Dr.) Anil D. Sahasrabuddhe, Chairman, All India Council for Technical Education (AICTE), New Delhi, said, “Today, it is necessary to bring about changes in present education system, but teachers are responsible for the implementation of these changes. The value education & spirituality course of the Education Wing RERF and Brahma Kumaris will go a long way in making India the World Teacher through its components of positive thinking, skills education and value education. When the teachers will practise Rajyoga meditation and remain in the state of soul-consciousness, they will automatically inspire students.” He expressed his wish to introduce value education in 10,000 technical institutions of the country and hoped that the trained teachers of the Brahma Kumaris will cooperate to in this noble effort with a view to creating a Skill India and Digital and Divine India.

Rajyogini Dadi Ratan Mohini ji, the Joint Administrative Head of the Brahma Kumaris, said, “There is an urgent need to solve the riddle “Who am I?” If you will know that you are actually a soul, the child of the Supreme Soul, who is the Ocean of Peace, and your religion is peace, then you can remain in peace with clear understanding and perfect realization of the soul through practice of Rajayoga meditation.” She also said, “The more you know, understand this spiritual education, meditate and inculcate the divine virtues, the more you will experience peace and happiness in life.”

Dr. Jaswant Singh Yadav, Cabinet Minister for Skills Development, Labour and Employment, Factory and Boilers Inspection, Government of Rajasthan, said, “In true sense, the teachers are the builders of the nation. A teacher should ask himself/herself, “What do I want in life? For which work, God Has sent me here? Which teachings should I impart to the students? In reality, spiritual education can help in building the nation. If you join this organization and learn the spiritual knowledge and meditation, you will feel great spiritual change in your life.” He also said, “I like to introduce the Brahma Kumaris value education courses in Rajasthan, which will greatly benefit the students of state and make their welfare.”

Shri Uttam Prakash Aggarwal, former Chairman, I.C.A.I, New Delhi, said, “ I have never seen this new concept of Value & Spiritual Education (VES) in the world. This will bring our youth from the influence of western culture back to the roots of Indian ethos and culture. This education can create a sea-change in our thoughts and lifestyle and thereby bring about holistic transformation of the world at large.”

B.K. Nirwair, Secretary General, the Brahma Kumaris, Mount Abu, said, “The teachings of Shrimad Bhagavad Gita teaches us  to sow the seeds of  good deeds, so as  to reap good fruits. Man is the friend of his own self and also the foe of his own self. In every religion, people pray God to liberate them from the vices of lust and anger. But, the prayer is enough; there should be the personal will and interest to give them up. If you will meditate on God, do good deeds, inculcate spirituality, and purify yourselves, then God will guarantee you the life of 21 births characterized by peace, purity, prosperity, health, wealth and happiness.” He also inspired the teachers to be double teachers – teachers of their students as well as teachers of their own selves. He lamented that teachers now get lakhs of rupees as their annual salary but they have no good resolves (Sanskars) and attitudes (Vritti) in them. He advised them to consider spirituality, meditation, values and virtues and good resolves as their true properties of life which will make them divine, pure and powerful and enable them to lead a happy and peaceful life.

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व्यापार एवं उद्योग प्रभाग – नेशनल कांफ्रेंस एवं मैडिटेशन रिट्रीट
दिनांक २२ से २६ सितम्बर २०१७ ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत )
अध्यात्म को नजरअंदाज करने से बढ़ते हैं कष्ट
ज्ञान सरोवर में उद्यमियों का सम्मेलन आरंभ

माउंट आबू। २३ सितम्बर।प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ज्ञान सरोवर अकादमी परिसर में शुक्रवार देर शाम संगठन के व्यापार एवं उद्योग प्रभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का अतिथियों ने उदघाटन किया।

उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुंबई से आए प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक मोहन ने कहा कि अध्यात्म के महत्व को नजरअंदाज करने से जीवन में कष्टप्रद परिस्थितियों से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है। भौतिक सुखों के साधन बढ़ रहे हैं लेकिन जीवन मूल्य अपेक्षाकृत कम हो रहे हैं। झूठ, कपट, पाप के वातावरण को बदलने के लिए जीवन में सत्यता और पवित्रता की धारणा करने की प्रेरणा को किसी भी हालत में किनारे नहीं करना चाहिए।

मुंबई केमिकल एंड शिपिंग सीईओ, एमडी रूचिर पारिख ने कहा कि विकटतम परिस्थितियों में शाश्वत सत्य को सामने रखते हुए स्वयं को अध्यात्म से जोडऩा जरूरी हो गया है। अध्यात्म एकमात्र ऐसा मार्ग है जो हर परिस्थिति में स्वयं को संबल देने में सक्षम है। वर्तमान परिवेश के प्रतिस्पर्धात्मक युग के व्यापारिक क्षेत्र में सफलता अर्जित करने के लिए सिद्धांतों के अनुसार निर्धारित लक्ष्य को सामने रखकर किया गया कार्य फलीभूत होता है।

प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बी. के. योगिनी ने कहा कि सत्य धर्म को सबसे बड़ा धर्म मानते हुए स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन के अभियान में मनसा-वाचा-कर्मणा अपना अमूल्य योगदान देना चाहिए। समूचे विश्व में भारत की विविधता की एकता की परिपाटी की मिसाल अपने आप में अहम है। यहां पर धार्मिक स्थानों और पूजा करने वालों की संख्या विश्व भर में सर्वाधिक है।

जयपुर से आए प्रसिद्व उद्योगपति एम.एल. शर्मा ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संगठन द्वारा दिया जा रहा प्रेम व सदभाव का संदेश जीवन में धारण कर उसे व्यवहार में लाने से व्यापारिक क्षेत्र की हर चुनौती का सामना करना सुगम हो जाता है। संगठन की ओर से आयोजित की गई इस राष्ट्रीय कार्यशाला में व्यसाइयों व उद्योगपतियों को व्यापारिक क्षेत्र में सफल होने के सूत्र अवश्य मिलेंगे। जिससे देश भर से आए प्रतिनिधियों को अपने जीवन में परिवर्तन लाने की भी प्रेरणा मिलेगी।

प्रभाग की मुख्यालय संयोजिका बी. के. गीता बहन ने कहा कि संसार को सकारत्मक दिशा देने में व्यापारियों व उद्योगपतियों का बहुमूल्य योगदान होना चाहिए। अध्यात्म के सिद्धांतों को बारीकी से समझकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने में प्राथमिकता देनी चाहिए।

मंबुई से आए उद्योगपति मोहन भाई पटेल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज का ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति एवं आदर्श जीवन जीने की कला यहां सीखने को मिलती है।
मुंबई से आए बीके हरीश, बीके नम्रता, बीके अमृता, बीके थविता आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का विधिवत उदघाटन किया।

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स्वस्थ और सुखी समाज के लिये सकारात्मक पत्रकारिता अपनाने पर सहमति
शांतिवन में मीडिया महासम्मेलन में कार्य योजना स्वीकार

आबू रोड, 18 सितम्बर, निसं। स्वस्थ और सुखी समाज के लिये सकारात्मक पत्रकारिता अपनाने का संकल्प 1500 से अधिक मीडियाकर्मियों, शिक्षाविदों , जनसंपर्क अधिकारियों व विषय विशेषज्ञों ने शांतिवन परिसर में ब्रह्माकुमारीज के मीडिया प्रभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन के समापन सत्र में लिया।
प्रभाग के उपाध्यक्ष ब्र.कु्. आत्मप्रकाश द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना स्वीकार की गयी। इसमें आध्यात्मिक चिन्तन , शांति व खुशी के लिये राजयोग अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। युवा पत्रकारों के समक्ष आ रही चुनौतियों के साथ उन्हें अवसर भी उपलब्ध हों इसके लिए ठोस कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की गई। सकारात्मक खबरों को अधिक स्थान देने, राष्ट्रहित में साम्प्रदायिकता और क्षेत्रवाद से सम्बद्ध विषयों की बजाये अहिंसा व परस्पर सद्भाव बढ़ाने वाली खबरें अधिक प्रकाशित करने की आवश्यकता जताई गई। घटती विश्वस्नीयता पर चिन्ता व्यक्त करते हुये नैतिक मूल्यों व सामाजिक सरोंकारों पर ध्यान देकर आन्तरिक सशक्तिकरण विकसित करने पर मीडिया कर्मी सहमत हुये।
समापन सत्र को सम्बोधित करने वालों में जनसंपर्क परिषद बैंगलौर के मुख्य प्रेरक एम.बी. जयाराम , ब्र.कु. गिरीश , डा. युधिष्ठिर , डा. सविता, ब्र.कु. अमरचन्द, ब्र.कु. पूनम व सेवन स्टार मीडिया के अध्यक्ष डा. शरद गांधी शामिल थे। हैदराबाद की योगिनी खानौरकर के कत्थक नृत्य व बेलागवी की शिल्पा के गीत ने समापन सत्र की शोभा बढ़ाई। इससे पूर्व खुले सत्र में सामाजिक बदलाव और लोकमत निर्माण में मीडिया की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
वक्ताओं में राजस्थान विश्वविद्यालय दूरसंचार केन्द्र के अध्यक्ष डा. संजीव भानावत, मदरहुड विश्वविद्यालय रूड़की के प्रो. चांसलर, डा. राजीव त्यागी, अखिल भारतीय लघु समाचार पत्र संघ के अध्यक्ष श्याम सुन्दर त्रिपाठी, पुणे के अनन्य मेहता , बैंगलौंर की गीता शंकर, रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार मधुकर द्विवेदी व बड़ोदरा के ब्र.कु. नर्रेन्द्र शामिल थे। अध्यक्षता पब्लिक रिलेशन्स वायस हैदराबाद के सम्पादक डा. सी.वी. नरसिम्हा रेड्डी ने की।
तीन दिन तक चले इस महासम्मेलन में ध्यान और राजयोग सत्रों का आयोजन पत्रकारिता के लिए नया आयाम साबित हुआ। जिसमें हर पत्रकार ने बड़ी तन्मयता से इसे आत्मसात करने और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देने पर संकल्पों के साथ अपने-अपने स्थानों के लिए रवाना हो गये।

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ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),०१ सितम्बर २०१७ । आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था ,”मेडिकल विंग’ के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था -” माइंड ,बॉडी ,मेडिसिन -करिश्मा सृजन -जीवन उत्सव “ . इस सम्मलेन में बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का उद्घाटन सम्पन्न हुआ.
 
ब्रह्मा कुमारीस के कार्यकारी सचिव राजयोगी मृत्यंजय जी ने आज का अध्यक्षीय प्रवचन दिया। आपने कहा की यह सम्मेलन सामान्य सम्मेलन नहीं है बल्कि यह अनेक लोगों के ज्ञान चक्षु को खोलने वाला सम्मेलन है। यह सम्मेलन जीवन उत्सव को मनाने का सम्मेलन है। अगर आपने मैडिटेशन सीख लिया तो हर जन्म में आप हर प्रकार की परेशानी से मुक्त हो जाएंगे। आत्मा की सारी बीमारी समाप्त हो जायेगी। आप समाज के लिए उपयोगी हो जाएंगे और समाज का उपकार कर पाएंगे। यहां आकर आप डबल डॉक्टर बन कर जाएंगे। आपको मेरी शुभ कामनाएं।
 
राजयोगिनी दीदी डॉक्टर निर्मला जी , निदेशक ,ज्ञान सरोवर ने अपना आशीर्वचन इन शब्दों में दिया। आपने कहा की इस सम्मेलन मैं आप सभी का स्वागत है। यह एक अलग किस्म का सम्मेलन है। इस सम्मेलन में आप जानेंगे की आपको किस प्रकार अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन के साथ समन्वय लाना है ?? आज कल अधिकांश रोगी – मानसिक नकारात्मकता के कारण बीमार पड़ रहे हैं। उनको दवा के साथ साथ नकारात्मकताओं से मुक्ति का भी मार्ग बताना चाहिए। मैडिटेशन हमारी मदद करता है – हमें सकारात्मक बना देता है। इससे बीमारियां समाप्त होती हैं। मैडिटेशन से मन में दया करुणा और सहानूभूति पैदा होती है। इससे रोगी जल्दी रोग मुक्त हो जाते हैं। मैडिटेशन हमें धैर्य रखना सिखाता है ,हमें सशक्त बनाता है। हम अधिक बेहतर डॉक्टर बन पाते हैं। हमारा लालच ख़त्म होता है। हम भ्रस्टाचार से अलग हो पाते हैं। अतः ध्यान का अभ्यास करना जरूरी है।
 
चिकित्सा प्रभाग के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक मेहता ने अपने उदगार इन शब्दों में प्रकट किये। आपने कहा की आप इस सम्मलेन में जानेंगे की आप हैं कौन ? आप अपने जीवन की यात्रा यहीं से शुरू करेंगे। अब आप डबल डॉक्टर्स बनने वाले हैं। मुझे विश्वास है की यह पूरा सम्मेलन आपके लिए यादगार रहेगा। आज तनाव जनित बीमारियों की वजह से रोगी मर रहे हैं। पहले ऐसा नहीं था। पहले संक्रामक बीमारियों से लोग मरते थे। यहाँ आपको तनाव मुक्ति की विधि बतायी जाएगी। उसको सीख कर आप हर प्रकार की बीमारियों पर विजय प्राप्त कर लेंगे।
 
चिकित्सा प्रभाग के उपाध्यक्ष डॉक्टर प्रताप मिड्ढा ने कहा की मेरा मानना है की डॉक्टर्स की पहली प्राथमिकता है लोगों को शिक्षित करना – अच्छी आदतों के बारे में , रोग मुक्ति के बारे में। मगर दुखद है की डॉक्टर्स भी गंभीर नहीं हैं की व्यसन किस प्रकार से हमारे लिए हानिकारक हैं। शायद इसी लिए अनेक डॉक्टर्स भी व्यसन के आदी है और उसकी उपयोगिता भी प्रमाणित करना चाहते हैं। यह अनुचित है। हमें चाहिए की हम रोगी को पूर्णता के साथ मुक्ति प्रदान करें। डबल डॉक्टर्स की यही जरूरतें हैं। डॉक्टर्स को विद्यार्थियों को व्यसनों के बारें में शिक्षित करना चाहिए। यह बड़ी जिम्मेवारी है। मगर संभव है। मैं चाहूंगा की प्रत्येक अस्पताल में एक ध्यान कक्ष होना चाहिए जहां रोगी अपनी आतंरिक शांति को महसूस कर सके।
 
रमेश मित्तल ,चांसलर, मेडी कैप्स विश्वविद्यालय ,इंदौर ने कहा की रोगी आपके पास आते हैं तो आपको भगवान् मानते हैं। आप उनके साथ न्याय करिये। उनपर ध्यान दीजिये। धन तो आपके भाग्य में जितना है वो मिलेगा ही। बिना आशीर्वाद का धन बेकार है , उसमें बद दुवाएं समायी हैं। ईमानदारी को अपनाईये। मैं इनसे अभिभूत हूँ। इनका त्याग तपस्या काबिले तारीफ है। मैं इनसे सीखना चाहता हूँ।