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विश्व बन्धुत्व के लिए जमीन से 4800 फीट उंचाई तक अन्तर्राष्ट्रीय मैराथन में दौड़े धावक दादी प्रकाशमणि की दसवीं पुण्य तिथि पर आयोजन
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आबू रोड, 20 अगस्त, निसं। राजस्थान में पहली बार आबू रोड से माउण्ट आबू तक 4800 फीट उंचाई तक 21 किमी अन्तर्राष्ट्रीय मैराथन में भारत तथा देश के कई हिस्सों से आये सैकड़ों की संख्या में धावकों ने दौड़ लगायी। प्रात: साढ़े पांच बजे आयोजित इस मैराथन का उदघाटन राजस्थान सरकार के गोपालन मंत्री ओटाराम देवासी, जिला प्रमुख पायल परसराम पुरिया, फिल्म अभिनेता उपेन पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी, मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष बीके करूणा, शांतिवन प्रबन्धक बीके भूपाल, जिला कलेक्टर संदेश नायक और बीके भरत ने मशाल जलाकर तथा हरी झंडी दिखाकर रवानगी दी।
इस अवसर पर गोपालन मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्था ने जिस प्रकार आपदा के समय में लोगों की मदद की है उससे सरकार को और आम लोगों को काफी सहायता मिली। जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि सभी मिलकर संस्था के संकल्प को पूरा करने का प्रयास करेंगे। जिला प्रमुख पायल परसराम पुरिया ने कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि समय प्रति समय इस संस्था द्वारा लोगों की विकास हेतु लगतार कार्य किये जाते हैं। इसमें हम लोग शामिल होकर लोगों का उत्साहवर्धन करते हैं। फिल्म अभिनेता उपेन पटेल ने कहा कि मैं बहुत खुश हूॅं कि हमें ऐसी जगह पर आने का अवसर पर मिला है। एशियन चैम्पिनय डा0 सुनिता गोदारा ने कहा कि हमें विश्वास है कि इस तरह के प्रयास से अन्तर्राष्ट्रीय पहिचान मिलेगी।
ब्रह्माकुमारीज संस्था के मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष बीके करूणा ने कहा कि हमारा प्रयास लोगों में विश्व बन्धुत्व की स्थापना करने में सहयोग प्रदान करना है। दादी जी का हमेशा से यही प्रयास रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी, विधायक जगसीराम कोली, समाराम चौधरी ने भी अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोगों को हर वक्त खड़ा रहना चाहिए।
कार्यक्रम के अवसर पर जिला कलेक्टर संदेश नायक, नगरपालिका प्रमुख माउण्ट आबू सुरेश थिंगर, आबू रोड पालिका चेयरमैन सुरेश सिंदल समेत, तहसीलदार मनसुख डामोर समेत कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त कर मैराथन को हरी झंडी दिखायी।

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आबू रोड, 14 अगस्त, ब्रह्माकुमारीज संस्था के शांतिवन में विशाल पंडाल में लगे श्रीकृष्ण की झांकी देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसका उदघाटन ब्रह्माकुमारीज संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयेागिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि श्रीकृष्ण एक महायोगी थे। उन्होंने योग कर अपने जीवन को 16 कलाओं से सम्पन्न एवं सम्पूर्ण बना लिया था। इसलिए हमें भी इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

कार्यक्रम में तहसीलदार मनसुख डामोर ने कहा कि इस झांकी के जरिये लोगों में श्रेष्ठ मूल्यों के प्रति प्रेरणा मिलेगी। ब्रह्माकुमारीज संस्था के महासचिव बीके निर्वेर ने कहा कि हमारा जीवन भी श्रीकृष्ण की भाति होना चाहिए। थानाधिकारी सुमेर सिंह ने कहा कि भारत में जितने भी त्योहार मनाये जाते है सब मनुष्य की उन्नति के लिए है। ब्रह्माकुमारीज संस्था की कार्यक्रम प्रबन्धिका बीके मुन्नी ने भी कार्यक्रम को संबोंधित किया।

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मेरा भारत स्वर्णिम भारत अभियान का भव्य शुभारंभ
– गुजरात के उपमुख्यमंत्री भ्राता श्री नितिनभाई पटेल जी ने हरी झंडी दिखाकर
मेरा भारत स्वर्णिम भारत अभियान की पीस मैसेंजर बस को किया रवाना
पीस मैसेंजर बस एक्टीबिशन से एक माह तक अहमदाबाद में देंगे शांति का संदेश

अहमदाबाद- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के यूथ विंग की ओर से मेरा भारत स्वर्णिम भारत अभियान का भव्य शुभारंभ रविवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, राजपथ क्लब लेन बोडकदेव में आयोजित गरिमामयी समारोह में किया गया। मुख्य अतिथि गुजरात के उपमुख्यमंत्री भ्राता श्री नितिनभाई पटेल जी ने हरी झंडी दिखाकर पीस मैसेंजर बस को रवाना किया। इसके पूर्व राजयोगिनी दादी रत्नमोहिनी ने यात्रा के मैनेजर बीके मुकेश भाई को मशाल थमाकर युवाओं में सकारात्मकता, स्वच्छता और आध्यात्मिकता की अलख जगाने का आह्नान किया। पीस मैसेंजर बस तीन साल तक भारत वर्ष के गांव से लेकर कस्बों और शहरों में शांतिदूत बनकर जाएगी और इसके माध्यम से युवा भाई-बहनें शांति, स्वच्छता और जनजागृति का पैगाम देंगे। अभियान के तहत एक माह तक अहमदाबाद शहर में ही पीस मैसेंजर बस एक्टीबिशन शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जाएगी।
Youth Bus Campaign - Launching Event (Ahmedabad) (5)

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री भ्राता श्री नितिनभाई पटेल जी ने कहा कि छोटा सा दीपक उजाला कर सकता है, हमने तो आज मशाल जलाई है। ये अभियान राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इससे लोगों में वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश जाएगा। ब्रह्माकुमारी संस्था ने आज बहुत ही अच्छे कार्य की शुरुआत की है, जो काम राज्य और केंद्र सरकार को करना चाहिए, वह यह संस्था कर रही है। अभियान के माध्यम से निश्चित ही लोगों को लाभ मिलेगा। इससे लोगों को स्वच्छता, आध्यात्मिकता और सकारात्मकता का संदेश मिलेगा। यदि हम मजबूत होंगे तो देश मजबूत होगा, क्योंकि व्यक्ति की मजबूती में ही देश की मजबूती है। हमें भारतीय संस्कृति को बचाकर रखना है। वास्तव में आज सभी जनप्रतिनिधियों को मेडिटेशन की बहुत जरूरत है। क्योंकि सबसे ज्यादा तनाव तो नेताओं को ही होता है। मेडिटेशन से बहुत लाभ होते हैं।

ब्रह्माकुमारी संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका व यूथ विंग की चेयरपर्सन राजयोगिनी दादी रत्नमोहिनीजी ने कहा कि परमपिता परमात्मा सर्व आत्माओं के प्रति शुभकामना रखते हैं। आत्मिक रूप से हम सभी भी आपस में भाई-भाई हैं। इसलिए हमें भी सभी के प्रति शुभभावना और शुभकामना रखना चाहिए। सदा ऐसा व्यवहार करें जो स्वयं के साथ दूसरों को भी सुख दे। मैं परमात्मा की संतान हूं, स्वयं से पूछें कि मैं अपने पिता की शिक्षाओं के अनुरूप कार्य करता हूं। सदा शांति, प्रेम, स्नेह देते हुए हर कार्य सच्ची दिल से करेंगे तो कदम- कदम में पदमगुणा कमाई जमा होगी। हमारे पुण्य का खाता बढ़ेगा और परमात्मा का आशीर्वाद मिलेगा। हर घड़ी को अंतिम घड़ी मानकर चलें।

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न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है निष्ठा: न्यायधीश अरोरा
न्यायविदों के सम्मेलन में जुटे देशभर के न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोग

आबू रोड, 12 अगस्त। आज लोगों की निगाहें सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया पर ही निर्विवाद रूप से टिकी है। क्योकि जब व्यक्ति को समाज से भरोसा उठ जाता है तो वह न्यायालय का रूख करता है। न्यायविदों को चाहिए कि वे न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अपनी निष्ठा बनाये रखें। उक्त विचार इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायधीश जस्टिस देवेन्द्र कुमार अरोरा ने व्यक्त किये। वे ब्रह्माकुमारीज संस्था के शांतिवन में न्यायविदों के सम्मेलन में सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि विश्व शांति के लिए न्यायिक प्रक्रिया की महती भूमिका है। क्योंकि न्यायालय में आने वाले लोग अशांत और किसी ना किसी परिस्थिति से पीडि़त होते हैं। ऐसे में उन्हेंं शांति और खुशी की जरूरत होती है। ऐसे में न्याय के साथ उन्हें सही मार्ग पर चलने के लिए राजयोग और ध्यान की भी जरूरत होती है ताकि वे अपनी आन्तरिक शक्ति को बढ़ा सकें।

संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि सबसे बड़ा न्याय करने वाला सर्वशक्तिवान परमपिता परमात्मा है। इसलिए परमात्मा से डरने की जरूरत है। क्योंकि भगवान के न्यायालय में देर है अंधेर नहीं है। इसलिए हर कर्म परमात्मा को ध्यान में रखते हुए हर कर्म करते हुए जीवन में तरक्की करना चाहिए। भले ही यहॉं हमें न्यायालय में न्याय मिल जाती है परन्तु असली न्याय परमात्म के दरबार में ही मिलता है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधिपति भगवान दास राठी ने कहा कानून और कचहरी का जब भी जिक्र होता है, न्याय की देवी की मूरत साथ ही उभरती है – आँखों पर पट्टी बंधे , शिर पर ताज , हाथ में तराजू और दूसरे हाथ में तलवार । आँखों पर पट्टी का मतलब है सब को एक जैसा मानना, निष्पक्षता । ताज का मतलव है कोई भी परिस्थिति में डगमगाए नहीं। तराजू का मतलब है किसी भी विषय या व्यक्ति के गुण दोष को तौलना और फिर निर्णय देना । दूसरे हाथ में दोधारी तलवार है जो न्याय में निष्पक्षता का प्रतीक है ।

ब्रह्माकुमारीज संस्था के महासचिव बीके निर्वेर ने संस्थान द्वारा सिखाये जा रहे राजयोग ध्यान पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राजयोग व्यक्ति को आसुरी कर्मों से बचाता है। साथ ही अच्छे व बुरे कर्म की पहचान भी कराता है। यदि हम प्रतिदिन राजयोग का अभ्यास करें तो इससे बच सकते हैं।

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सुखी रहना है तो दूसरों को सुख देकर उनकी दुआएँ लो… ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी

रा​​यपुर, २६ जुलाई: आस्था और संस्कार चैनल पर प्रतिदिन प्रसारित होने वाले कार्यक्रम अवेकनिंग विथ ब्रह्माकुमारीज की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने कहा कि जीवन को सुखी बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाओ। कभी किसी को दु:ख मत दो। जितना दूसरों को सुख देंगे उतना बदले में दुआएं मिलेंगी और आपका जीवन स्वत: ही सुखमय बन जाएगा।
ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स स्थित इन्डोर स्टेडियम में आयोजित आध्यात्मिक समागम कार्यक्रम में विशाल जन समुदाय को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि सारे दिन में हम जिनके भी सम्पर्क में आते हैं, उनके साथ हमारा कार्मिक एकाउण्ट बनता है। अगर सारा दिन हम दूसरों को दु:ख देंगे तो हम स्वयं कैसे सुखी रह सकते हैं? जो कर्म करते हैं, उनका फल किसी न किसी रूप में हमें ही भोगना पडता है।

पुरानी बातों को मन में न रखें, उसे भूल जाएं:
उन्होंने नया रायपुर का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ सडक़ें और मकान बनाने से नया रायपुर नहीं बनेगा बल्कि अपनी सोच और संस्कार को भी नया बनाना होगा। उन्होंने मनुष्य के जन्मजात संस्कारों की चर्चा करते हुए बतलाया कि मनुष्य स्वभाव से ही सफाई पसन्द होता है। घर में कहीं पर गन्दगी हो तो उसे तुरन्त साफ करते हैं। कचरे को ज्यादा दिन रखेंगे तो कीड़े पनपेंगे, बदबू आएगी। इसलिए उसे जल्दी बाहर फेंकने की कोशिश करते हैं। इसी प्रकार हमारे मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना, ईष्या अथवा द्वेष आदि न हो। यह सब गन्दगी हैं जो कि हमें बीमार कर देंगे। इन्हें बाहर फेंक दें यानि भुला दें। मन में न रखें। जीवन में खुश रहना सीखें।
उन्होंने बतलाया कि कई लोग स्वयं को बदलने की बजाय दूसरों को बदलने में लगे रहते हैं। कमोवेश यह हम सभी की आदत सी हो गई है। समझदारी इसी में है कि हम अपने कर्मों को दूसरों के लिए सुखकारी बनाएँ, जो हमारे नियंत्रण में भी होता है। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों से प्रतिज्ञा करवायी कि जो संस्कार हमें या दूसरों को दु:खी करते हैं, उसे आज से बदलने का पुरूषार्थ करना है। यही जीवन को सुखद बनाने की पहली सीढ़ी है। हम दूसरों से अपेक्षाएँ बहुत करते हैं लेकिन स्वयं के कर्मों पर अटेन्शन नहीं रख पाते।

विचारों से बनता है -वातावरण:
उन्होंने बतलाया कि हमारे विचारों से वायुमण्डल बनता है। हमारी हर सोच दूसरों तक पहुँचती है। घर का वातावरण घर में रहने वाले लोगों के सोच से बनता है। मन्दिर का वातावरण इसीलिए इतना शान्त और पवित्र होता है, क्योंकि वहाँ पर लोग शुद्घ और पवित्र विचारों के साथ जाते हैं। हम सब जानते है कि जैसा कर्म वैसा फल मिलता है। इसलिए आप अपने लिए जो चाहते हैं, वही दूसरों को दें। इससे जीव श्रेष्ठ बन जाएगा। हमें जीवन में खुशी और शान्ति चाहिए तो इसे दूसरों को देना सीखें। हमारे मन में सबके लिए अच्छे और शुभ विचार होने चाहिए।