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On the occasion of International Yoga Day of Yoga organized by Ayush Karnataka, at Kanteerava stadium, Bengaluru, Respected brother BK Mruthyunjaya and B.k.Ambika behenji zonal in charge v.v.puram bangalore have spoken on behalf of Brahma Kumaris and 50 bks were on the stage giving a practical glimpse of meditation.

Nearly 7000 people had gathered including principle secretary health gov of Karnataka Smt.
​ ​Shalini Rajneesh , director Ayush and joint directors and yoga gurus from different yoga institutions graced the occasion. Programme was relayed in many TV channels.​

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तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पूर्व एक विशेष सार्वजनिक कार्यक्रम हुआ

’’शरीर व मन के सन्तुलन के लिए जरूरी है योग तथा जीवनशैली में परिवर्तन’’-श्री विजय गोयल
’’ध्यान योग से ही होगी मन में शान्ति और अपराध की रोकथाम’’- डॉ0एच.आर.नागेन्द्र

नई दिल्ली 18 जूनः तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयुष मंत्रालय के सहयोग से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आज सिरीफोर्ट सभागार में ’’योगा एक स्वस्थ जीवन शैली’’ तथा ’’शान्ति व सुख के लिए परमात्म शक्तियों की प्राप्ति ’’ शीर्षकों पर एक दिवसीय सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

युवा एवं खेल के केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री विजय गोयल मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि योग केवल व्यायाम तक ही सीमित न रह जाये, अतः इसे हम अपनी जीवनशैली बना लें। दिन प्रतिदिन हम ऐसे कर्म करते रहे है जो हमारे जीवन को बुराई की ओर ले जा रहें है। इसलिए हमें अपनी जीवनशैली में स्वस्थ एवं सकारात्मक परिवर्तन लाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि योग को खेलों में शामिल करने का प्रस्ताव आया है, परन्तु योग को हम खेलों की तरह प्रतियोगिता नहीं बना सकते। योग शरीर व मन दोनों के सन्तुलन के लिए जरूरी है, इसलिए योग को विद्यालयों में लागू करना आवश्यक है। योग से सकारात्मकता आती है और यह संस्कार माता-पिता के द्वारा बचपन से ही दी जानी चाहिए। सकारात्मक विचारों से एकाग्रता बढ़ती है जो योग की ओर ले जाने में सहायक है।

योग गुरू डॉ0 एच.आर.नागेन्द्र ने योग को स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल आसन ही योग नहीं परन्तु समग्रता आवश्यक है। योग जीवन जीने की कला है, मूल आत्म स्वरूप पर पहुँचना ही योग है, जिससे मन एकाग्र एवं शान्त होता है। सभी मनुष्यों में दैवी व आसुरी सम्पदा है, परन्तु योग द्वारा हम अपनी अपराध व भ्रष्टाचार रूपी आसुरी प्रवृतियों को समाप्त कर सकते हैं। दैवी सम्पदा मोक्ष की ओर ले जाती है इसलिए यही रास्ता उपयुक्त है।

उन्होंने आगे कहा कि योग से जीवन में सन्तुलन आता है। ध्यान योग हमारे मन को शान्त करता तथा विचारों की संख्या को नियंत्रित करता है। ध्यान योग से आन्तरिक शक्ति की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में योग को लाना है। उन्होंनेे कहा कि विश्व में शान्ति की स्थापना हेतु ब्रह्माकुमारीज द्वारा की जा रही आध्यात्मिक ज्ञान व योग की सेवायें सराहनीय है।

भारत एवं भूटान में संयुक्त राष्ट्र संघ के निदेशक डर्क सीगर ने इस उपलक्ष्य पर कहा कि योग भारत की समग्र विश्व को अनमोल भेट है। योग शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। भारत का यह प्राचीन योग इस समय के लिए बहुत-बहुत आवश्यक है जो किसी भी धर्म व जाति से सम्बन्धित नहीं बल्कि मानवता के लिए है। योग रोगों से मुक्ति दिलाती है, योग से विषम परिस्थितियों में भी तनाव मुक्त रहकर परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है तथा यह दिव्यांग लोगों के लिए भी सहायक है। योग हमें अन्तर आत्मा से जोड़ता है तथा हमें भौतिकता के कुप्रर्भाव से मुक्त करता है।

आयुष मंत्रालय के उप सचिव अन्शुमन शर्मा ने तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभ कामनायें देते हुए कहा कि योग के लिए संसाधन नहीं इच्छा की आवश्यकता है, योग से आनन्द की अनुभूति होती तथा कार्यकुशलता बढ़ती है। उन्होंने आयुष मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही अनेक योजनाओं से अवगत कराया तथा कहा कि योग समता और सामंजस्य का संदेश देेने का माध्यम है, जिससे वसुधैव कुटुम्बकम का स्वप्न साकार किया जा सकता है।

डी0आर0डी0ओ0 के अध्यक्ष डॉ0 ललित कुमार ने इस अवसर पर अपने जीवन के अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि राजयोग के द्वारा हमारी क्षमता बढ़ती है, योग व प्राणायाम से बिमारी का ठीक किया जा सकता है। राजयोग आँख खोलकर किया जाता है इसलिए इसे कर्म करते भी किया जा सकता है। डी0आर0डी0ओ0 ने राजयोग पर ब्रह़माकुमारीज के साथ मिलकर रिसर्च की तथा राजयोग को विषम परिस्थितियों में रहने वाले सैनिकों को सिखाया गया तो उनकी क्षमता, धर्यता एवं मानसिक सन्तुलन में वृद्धि हुई।

ब्रह्माकुमारी संस्था के रशिया स्थिति सेवाकेन्द्रों की निदेशिका बी0के0चक्रधारी ने ब्रह्माकुमारी संस्था का परिचय देते हुए कहा कि संस्था अपने 137 देशों में लगभग 8500 सेवाकेन्द्र के माध्यम से आत्मा, परमात्मा का ज्ञान, परमात्मा से सम्बन्ध अर्थात योग, और उससे अपने जीवन में धारणाओं के पश्चात ईश्वरीय सेवा से मनुष्य जीवन और समाज में सुख शान्ति आती है।

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जीवन को सात्विक बनाती है आध्यात्मिकता ज्ञान सरोवर में कला, संस्कृति सम्मेलन आरंभ

माउंट आबू, १७ जून। पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय प्रिय ने कहा है कि आध्यात्मिकता जीवन को सात्विक बनाती है। प्राचीन भारतीय संस्कृति को बचाने की जरूरत है। इस भगीरथ कार्य में कलाकार अपना कला की ताकत का सदुपयोग कर सकते हैं। जो कला के माध्यम से समाज को नई दिशा दिखा सकते हैं। वे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कला और संस्कृति प्रभाग के तत्वाधान में आयोजित सम्मलेन के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

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उन्होंने कहा कि हमारा संविधान पूरी तरह आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत है। हमारे पूर्वज भी इन बातों के आधार पर ही जीवन व्यतीत करते थे। आध्यात्मिकता को अपनाने से जीवन सफल हो जाता है। ब्रह्माकुमारीज की ओर से प्रशिक्षित राजयोग की शिक्षाएं पूरी तरह आध्यात्मिक हैं जिनसे मुझे गहरी प्रेरणा मिली है। इससे हमारा आतंरिक विकास होता है।

ज्ञान सरोवर की निदेशिका राजयोगिनी डॉक्टर निर्मला दीदी ने कहा कि आत्मा और परमात्मा को सही रीति से जान लेने के बाद हमारी दृष्टि व वृत्ति सकारात्मक हो जाती है। जीवन में भाईचारे की भावनाओं का समावेश होता है। मनसा-वाचा-कर्मणा आध्यात्मिक शक्तियां जीवनशैली को अलौकिक बना देती हैं।

ओ माय गॉड सहित अनेक प्रसिद्ध फिल्मों के निर्देशक, फिल्म निर्देशक उमेश शुक्ल ने कहा की कोई भी कार्य अगर ईश्वर की याद में किया जाए तो उसमे काफी सफलता प्राप्त होती है। यहां आकर आज मैं यह दावा कर सकता हूँ कि मेरे मन में जो काँटा लगा हुआ था वह अब निकल गया है। यह एक अद्भुत स्थल है जहां ईश्वर की कृपा बरस रही है।

ब्रह्माकुमारी संगठन के कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय ने कहा कि कलाकार अपनी कला के माध्यम से जीवन को संगीतमय बनाने में सक्षम होते हैं। जीवन में दिव्यता , पवित्रता, शांति और प्रेम भर जाए तो इस दुनिया को कलाकार आसानी से स्वर्ग बना सकेंगे। राजयोग के अभ्यास से मन की शक्तियां जागृत होती हैं। जिससे आपकी सोच की दिशा परिवर्तित व सार्थक बनेगी।

मुंबई से आए फिल्म निर्देशक प्रेम राज ने कहा कि ईश्वर की कृपा से ही विश्व परिवर्तन के कार्य को लेकर इतने लोगज्ञान सरोवर में परिसर में एकत्रित हुए हैं। उन्होंने अपने जीवन का अनुभव सुनाते हुए कहा कि राजयोग से मैं अवसाद से बाहर निकला हंू। आत्म हत्या जैसे विचारों से मुक्ति प्राप्त की। प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके सतीश ने कहा कि आध्यात्मिकता से विहीन समाज अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह पायेगा। जब राष्ट्र्र की संस्कृति पर चोट होती है तो वह राष्ट्र भी समाप्त हो जाता है।

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आध्यात्मिकता और विज्ञान के सहयोग से विश्व में शांती
​​ब्रह्माकुमारीज् स्पार्क विंग द्वारा राष्ट्रीय संगोष्टी संपन्न

जलगांव – आध्यात्मिकता के बिना सहारे विज्ञान अधुरा है, आध्यात्मिकता और विज्ञान के सहयोग से विश्व में सुख, शांती, सद्भावना तथा एकता स्थापित की जा सकती है. ज्ञान तथा विज्ञान की गुह्य परिभाषा – संकल्पनाओं को आम आदमी तक सरल शब्दों में पहूंचाना यह आध्यात्मवेत्ता तथा वैज्ञानिकों का कर्तव्य है और इससे ही आध्यात्मिकता और विज्ञान के समन्वय सें मूल्यनिष्ठ समाजनिर्मिती होगी, एैसी उम्मीद जताई, ब्रह्माकुमारीज् स्पार्क प्रभागद्वारा वैज्ञानिकों में आध्यात्मिकता विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्टी में सहभागी वैज्ञानिक, तथा आध्यात्मवेत्ताओंने.

स्प्रिच्युअल ऍप्लिकेशन्स रिसर्च सेंटर के ब्रह्माकुमारीज् जलगांव चॉप्टर की ओर से प्राकृतिक सौदर्य तथा आध्यात्मिक वातावरण से भरपूर अनुभूती इंटरनॅशनल स्कूल, जलगांव में वैज्ञानिकों में आध्यात्मिकता विषयपर राष्ट्रीय संगोष्टी का आयोजन किया गया. जिस में देशभर से वैज्ञानिक तथा आध्यात्मवेत्ताओंने सहभाग दर्ज किया. सम्मेलन के प्रारंभ में ब्र.कु. विद्याबहनने ब्रह्माकुमारीज् का परिचय दिया. अपने प्रास्ताविक संबोधन में गुजरात से पधारे ब्र.कु. विनय पण्डयाने स्पार्क प्रभाग की जानकारी दी. ब्र.कु. वासंती तथा ब्र.कु. निलीमा बहनने क्रियेटीव्ह मेडिटेशन सत्र में उपस्थितों को राजयोग का अभ्यास करवाया.

ब्र.कु. मिनाक्षीदीदी उपक्षेत्रीय निर्देशिका, जलगांव उपक्षेत्र ने आपने आशीर्वचन में कहा की, सायन्स और सायलेन्स दोनों का महत्व अपने आप में बडा है , दोनों के सुंदर समन्वय से विश्वशांती निश्चित है. संमेलन का उद्देश स्पार्क प्रभाग के मुख्यालय समन्वयक, बी.के. श्रीकांत भाईने दिया. विशेष माऊंट आबू से पधारे ब्र.कु. सुरजभाईने अपने ओजस्वी संबोधन में , मानवीय जीवन और आध्यात्मिकता विषयपर प्रकाश दिया. संगोष्टी के लिए मुख्य संबोधन स्पार्क प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका ब्र.कु. आंबिका बहन, बंगलौरने दिया. उन्होंने अपने प्रेरणादाई उद्बोधान में कहा की, हमेशा का मॅकनेकली जीवन न जिये, जीवन जीने का सच्चा आनंद लिजिए. अध्यात्म, कला, साहित्य, विज्ञान आदि के अनुभव से इस आनंद को प्राप्त किया जा सकता है.

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किसानों के सशक्तिकरण से ही होगा देश का विकास – जिला प्रमुख
विशाल स्तर पर वृक्षारोपण के लिए जागृति लाने के संकल्प के साथ अभियान का शुभारम्भ

आबू रोड, 6 जून, निसं। भारत की आत्मा आज भी गांवों में बसती है। भारत की सत्तर फीसदी लोग भी आज भी गॉंवों में रहते हैं। यदि किसान अनाज उत्पादन बंद कर दे तो देश जीना दूभर हो जायेगा। जब किसानों का सशक्तिकरण होगा तभी देश का विकास सम्भव है। उक्त उदगार जिला प्रमुख पायल परसराम पुरिया ने व्यक्त किये। वे ब्रह्माकुमारीज संस्था के शांतिवन में संस्थान के ग्राम विकास प्रभाग द्वारा आयोजित किसान सशक्तिरण तथा वृक्षारोपण एवं वृक्षपालन अभियान में उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रही थी।

उन्होंने कहा कि सिरोही भौगोलिक दृष्टिकोण से उपजाउ है परन्तु पानी की समस्या लगतार बनी रहती है। यदि ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाये जाये तो इससे इस समस्या का निदान हो सकता है। इसके लिए किसानों में जागृति और सशक्तिकरण दोनो ही जरूरी है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान का प्रयास निश्चित तौर इस क्षेत्र के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में इसके प्रति जागृति लायेगा। जिला प्रमुख ने रासायनिक खादों के बजाए जैविक और यौगिक खेती करने की अपील की।

इस अवसर पर ग्राम विकास प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके राजू ने कहा कि हमारा प्रयास है कि देश का किसान समृद्ध और खुशहाल रहे। इसके लिए किसानों में सशक्तिकरण के साथ सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए भी प्रेरित करना पड़ेगा। जब किसान जागरूक हो जायेगा तो वह समृद्ध हो जायेगा। क्योंकि उनकी आय का ज्यादातर हिस्सा व्यर्थ चीजों में चला जाता है। ग्राम विकास प्रभाग लगातार इसके लिए सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में दांतीवाड़ा प्रोजेक्ट के डीएफओ अग्रिहोत्री ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने के से ही पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकती है। बिना पौधे के मनुष्य का जीवन खतरे में पड़ जायेगा। यूआईटी सचिव अरविन्द जाखड़ ने भी इस अभियान से निश्चित तौर पर किसानों में सशक्तिकरण के साथ पर्यावरण बचाने के लिए मदद मिलेगी।

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मूल्यों के प्रसार से जीवन परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकता है मीडिया
माउंट आबू, ज्ञानसरोवर। ब्रह्माकुमारी संस्था की मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने मीडिया कर्मियों से आह्वान किया है कि वे ऐसे समाचार प्रसारित करें कि जिससे पूरी दुनिया को सही दिशा मिले। आज ज्ञानसरोवर परिसर में ब्रह्माकुमारी संस्था के मीडिया प्रभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय महासम्मेलन को विडियो कान्फ्रेन्सिंग के द्वारा सम्बोधित करते हुए उन्होने कहा कि समय की मांग है कि ईश्वरीय ज्ञान का व्यापक प्रसार किया जाए। इससे ही जीवन आदर्शमयी बन सकेगा। परमात्मा से जितना अधिक लोगों का जुड़ाव होगा उतनी ही उन्हें अधिक शक्ति प्राप्त होगी। ज्ञान व राजयोग के बल पर विश्व को परिवर्तित करना संभव होगा। मीडियाकर्मा मूल्यों के प्रसार से जीवन परिवर्तन के इस महाअभियान में सशक्त माध्यम बन सकते हैं।
संस्था के महासचिव ब्र.कु. निर्वैर भाई ने अपने विडियो संदेश में कहा कि तनाव भरे वातावरण में भले ही शांति का एहसास कठिन लगता है लेकिन मेडिटेशन का जीवन में समावेश करके सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है। मीडियाकर्मियों को बड़े तपस्वी बताते हुए उन्होने कहा कि तपस्या के बिना लेखन संभव ही नहीं है। उन्होने विश्वास व्यक्त किया कि मेहमान बनकर आये मीडियाकर्मा ज्ञानसरोवर में ज्ञान की डुबकी लगाकर यहां से महान बनकर जायेंगे।
ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एन.के.सिंह ने कहा कि भारत की प्रत्येक संस्था में जब पतन हो रहा है तो मीडिया इससे कैसे अछूता रहता। दिक्कत यह है कि सूचना के अभाव के कारण मीडिया नैतिक दायित्व सही तरह से नहीं निभा पाता। मीडियाकर्मियों को सोचना होगा कि हमें परमात्मा ने नेताओं के कसीदे गढ़ने के लिए इस क्षेत्र में नहीं भेजा। दुर्भाग्य से भारत में गलत प्रतिमान बन रहे हैं। मूल्यों में तेजी से हो रही फिसलन को थामने का सामर्थ्य ब्रह्माकुमारीज जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं में है। हमें इनसे सहयोग करके टुकड़ों में बँट रहे समाज को सही दिशा देने की कठिन परीक्षा में खरा उतरना होगा। कमी हमारी नीयत में नहीं बल्कि ज्ञान में है, इस कमी को दूर करने का नेक नीयती से प्रयास करें।
संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी ने अपने आशीर्वचन में मीडिया के कार्य को उत्तम बताते हुए सत्य को परखने और दूसरों के दुख दूर करने में सहभागी बनने का आह्वान किया। मीडियाकर्मियों से कहा उनकी लेखनी समाज को राहत पहुंचाने वाली हो, अशांति फैलाने वाली नहीं।
न्यू वर्ल्ड इंडिया के प्रबंध निदेशक अनिल राय ने कहा कि लोकतंत्र के अन्य स्तम्भों की तुलना में मीडिया के पास संसाधनों का अभाव है। मीडियाकर्मा अपना भविष्य सुरक्षित नहीं महसूस करते। व्यवसायिक लाभ अर्जित करने के लिए नकारात्मकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। टीवी सीरियल विषाद अधिक पैदा करते हैं। यदि हम अपनी परेशानी जानने के लिए आत्मचिन्तन करें तो उसका निवारण करना मुश्किल नहीं होगा। व्यवसाय को समाचारों की सत्यता पर हावी ना होने दें। इस कार्य में मेडिटेशन सहायक बन सकता है।

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A Workshop “Spiritual Pathway for good Governance and Social Security, was organized on 23.5.2017 at BrahmaKumaris Vishwa Shanti Sarovar Retreat Centre, Cuttack. By Department of Social Security,Empowerment of Persons with Disabilities by Govt, of Odisha in collaboration with the BrahmaKumaris

Sister Manashi  Limbhal,  IAS The Director Welcome the participant assemble in the workshop. The workshop was represented by Centre Incharge of BrahmaKumaris of 30 Districts of Odisha along with the Hon’ble Minister Prafulla Kumar Samal, Bro. Niten Chandra , IAS, Principal Secretary, Sister Manashi  Limbhal, IAS, Director, Social Security Empowerment of persons Department.

The centre of attraction of the Workshop was B.K. Bharti was shared her experience on De-addition Programme Kandhamala District.

The Hon’ble Minister in his speech glorified the activities of BrhamaKumaris and said that the 72.000 Anganwadi Centres of Odisha should have connectivity with the BrahmaKumaris to be apprised of the Spirituality to be imparted to the public.

The Principal Secretary emphasised that only the Brhama Kumaris can actively participate in the De-addition programme for a fruitful benevolent result.

The BRAIL book “Spiritual Knowledge and Rajyoga Meditaion” for 7days course authored by B.K. Suryamani was opened by the Hon’ble Minister.

Rajyogi BrahmaKumar Dr. Banarasi Bhaiji Executive Secretary, Medical Wing, Brahma kumara’s  Mt. Abu in  his emphatic speech said that it is only at BrahmaKumaris Odisha that the Govt. have extended their hands to BrahmaKumaris to achieve the Goal, But it is the never a case any where in India.

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एकाग्रता की शक्ति से आएगा संतुलन जीवन में : विधान सभा अध्यक्ष कँवर पाल

ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),२७ मई २०१७ । आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था ,वैज्ञानिक और अभियंता प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था -“जीवन और कर्म में संतुलन ” .इस सम्मलेन में बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का उद्घाटन सम्पन्न हुआ.sew.jpg6

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आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ठाणे सब जोन की संचालिका राजयोगिनी गोदावरी दीदी ने अपना आशीर्वचन इन शब्दों में दिया। आपने कहा की परमात्मा शिव ऐसा बताते हैं की मनुष्यों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। अपनी दृढ़ता के आधार पर वह कुछ भी कर सकता है। अपने कर्मों को आध्यात्मिकता का पुट देकर जीवन से उसका संतुलन कायम किया जा सकता है। हम सभी अपना नियत कार्य करते हुए भी मन से ईश्वर का स्मरण कर सकते हैं। ईष्वरीय स्मृति में किया गया कार्य उत्तम होने के कारण जीवन में संतुलन लाता है। योगाभ्यास से एकाग्रता आती है और इस शक्ति से कर्म और जीवन का संतुलन कायम रहता है।

हरयाणा विधान सभा के अध्यक्ष कँवर पाल जी ने उद्घाटन कर्ता की हैसियत से कहा की जीवन में संतुलन अनिवार्य है। मगर आम तौर पर हमारा जीवन एकांगी हो जाता है। हम सभी किसी एक ही दिशा में बढ़ जाते हैं। काम पर काम किये जाते हैं और परिवार पीछे छूट जाता है। ऐसा ठीक नहीं है। खेतों में जरूरत से अधिक खाद का प्रयोग करके हमने फसल तो प्राप्त कर लेते हैं काफी – मगर आज हमारी भूमि बंजर हो जाती है। संतुलन रखना चाहिए था जो नहीं हुआ। सितार के तार को भी सनतुलन में कसने पर ही ध्वनि आएगी। संतुलन के लिए ईश्वर की शरण चाहिए। आत्मा को समझना होगा। एकाग्रता लानी होगी। अपने व्यक्तिगत जीवन को संतुलित करके ही हम किसी को भी प्रेरणा दे सकेंगे।

भारी जल बोर्ड , एटॉमिक ऊर्जा विभाग, मुंबई के अध्यक्ष ए एन वर्मा ने मुख्य अतिथि के तौर पर कहा की अगर जीवन संतुलित नहीं है तो बेकार है। हम सभी जीवन की तुलना में अपने कार्य को ९५ प्रतिसत वरीयता देते हैं। और जीवन को मात्र ५ प्रतिसत। इसका उल्टा करना होगा। जीवन को योग्य बनाने के लिए ९५ प्रतिसत प्राथमिकता देनी होगी। आपने होमी जहांगीर भाभा के हवाले से कहा की वे वैज्ञानिक आध्यात्म की वकालत करते थे। उनका कहना था की उत्तरदायित्व वहन करना और सकारात्मक बने रहना आध्यात्मिकता का परिणाम है। वैज्ञानिकों के लिए भी यह जरूरी है। उन्हें भी आत्मा को जानना चाहिए और उससे जुड़ना चाहिए। आध्यात्मिक होकर ही वे अपने कार्य और जीवन को सनतुलन में ला पाएंगे।

रजत हांडा , महा प्रबंधक , मारुती उद्योग ,गुरुग्राम ने अतिरिक्त मुख्य अतिथि के रूप में कहा की कार्य के दबाव की वजह से उनका घरेलू जीवन काफी अस्त व्य्स्त था। घर में वे अशांति का कारण बने हुए थे। मगर एक कार्यकारी महिला और गृहणी होते हुए भी उनकी पत्नी का जीवन शांत और प्रसन्न था। हांडा साहब ने उनसे इसका राज पूछा। पत्नी ने बताया की वह राजयोग का अभ्यास करती है जिसका ज्ञान उनको ब्रह्मा कुमरी आश्रम से प्राप्त हुआ है। रजत हांडा ने भी राजयोग सीखा और अभ्यास किया। आज कार्य की अधिकता के बावजूद भी वे अपने जीवन को संतुलित बना सके हैं।

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योग के साथ राजयोग से होगा मनुष्य का सम्पूर्ण विकास
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आबू रोड़, 26 मई, निस.। शरीर को सम्पूर्ण स्वस्थ्य रखने के लिए संतुलित भोजन की जितनी आवश्यकता हैं उतना ही महत्व दैनिक जीवनचर्या में योग और राजयोग का भी हैं। शरीर को पूर्ण स्वस्थ्य रखने के लिए योग और मानसिक, सामाजिक, आध्यत्मिक रूप से तन्दरुस्ती के लिए राजयोग को जीवन में शामिल करना आवश्यक हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शारीरिक, मानसिक, समाजिक, अध्यात्मिक रूप से सम्पूर्ण स्वस्थ्य व्यक्ति को पूर्ण स्वस्थ्य मना गया हैं और ये तभी सम्भव हैं जब हम अपने दैनिकी जीवन में योग और राजयोग को शामिल करें। उक्त विचार ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान में 38वां अखिल भारतीय बाल व्यकित्त्व विकास शिविर में आए बच्चों के लिए दादी प्रकाशमणी पार्क में आयोजित योग और राजयोग अभ्यास कार्यक्रम में शिक्षा प्रभाग के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर डा. हरीश शुक्ला ने देश भर से आए हुए लगभग चार हजार बच्चों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि जीवन में राजयोग को शामिल करने से विद्यार्थियों के बौद्विक क्षमता, स्मरण शक्ति, एकाग्रता जैसे अनेक गुण आतें हैं। देश के कोने-कोने से आये हुए बच्चों ने बड़ी ही उत्साहित होकर कार्यक्रम में भाग लिया और दैनिकी जीवन चर्या में योग और राजयोग को शमिल करने की भी संकल्प किया। बच्चों को बड़े ही बारिकी से योगा प्रशिक्षक बीके बाबू भाई ने म्यूजिक के साथ योगा अभ्यास कराया।