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Honorable Chief Minister Dr. Raman Singh

The Rakhi Festival was celebrated with great enthusiasm by the Brahma Kumaris of Raipur, Chhattisgarh. BK Kamla, Zonal Director of the Brahma Kumaris in Chhattisgarh, tied sacred Rakhi to Honorable Chief Minister Dr. Raman Singh and presented him with a Godly gift and blessings.
BK Kamla also met Mr. Gourishankar Agrawal, Speaker of the Chhattisgarh Assembly; Brijmohan Agrawal Ji, Agriculture and WRD Minister; Smt. Ramshila Sahu, Social Welfare Minister; Rajesh Munat, PWD Minister; various IAS, IPS and IFS Officers including the Chief Secretary, MLAs, and MPs, etc., with whom she shared the spiritual significance of Rakshabandhan along with tying Rakhi and sharing sweets.

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सकारात्मक ऊर्जा का प्रकाशपुंज थी दादी प्रकाशमणि

– संयुक्त मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी के उद्गार
– दादी प्रकाशमणि का 11वां पुष्पांजली कार्यक्रम
– देशभर से पहुंचे 20 हजार से अधिक लोगों ने दी श्रद्धांजली
– सुबह 8 बजे से लेकर रात तक लगा रहा लोगों का तांता
– दादी की स्मृति में बने प्रकाश स्तंभ को फूलों से सजाया

25 अगस्त, आबू रोड (निप्र)।
dadi prakashmini news (1)

ब्रह्माकुमारी संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि के 11वें पुण्य स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को पुष्पांजली कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें देशभर से पहुंचे 20 हजार से अधिक लोगों ने दादी की स्मृति में बने प्रकाश स्तंभ पर पहुंचकर श्रद्धांजली दी। वहीं अलसुबह 3 बजे से ब्रह्ममुहूर्त में दादी की याद में सभी ने विशेष योग किया। इसके माध्यम से पूरे विश्व बंधुत्व, विश्व एकता और सद्भाव की कामना करते हुए योग के शुभ प्रकम्पन फैलाए। वहीं प्रकाश स्तंभ को विशेष रूप से कोलकाता से आए कलाकारों ने सजाया।

कार्यक्रम में मुख्य प्रशासिका 103 वर्षीय दादी जानकी ने कहा कि दादी प्रकाशमणि सकारात्मक ऊर्जा का साक्षात प्रकाशपुंज थीं। योग का ही कमाल है जो उनके एक-एक संकल्प साकार हो जाते थे। उन्होंने आध्यात्मिक ऊर्जा और परमात्म शक्ति से स्वयं को इतना सशक्त बना लिया था कि उनके सानिध्य में आने वाले हर कोई एक अद्भुत शक्ति और ऊर्जा का अनुभव करता था।

संयुक्त मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी ने कहा कि दादी ममता और स्नेह की साक्षात मूरत थीं। आपकी ममतामयी पालना का ही कमाल है जो आपके सानिध्य में 20 हजार से अधिक बहनों ने खुद को समाजसेवा और विश्व कल्याण के कार्य में अर्पण कर दिया। महासचिव बीके निर्वैर भाई ने भी दादी के साथ के अपने अनुभव सांझा किए।

जनरल मैनेजर बीके मुन्नी बहन ने कहा कि मैं खुद को भाग्यशाली समझती हूं जो दादी के अंग-संग 40 साल से अधिक समय तक रहने का मौका मिला। दादी का एक-एक बोल वरदानी बोल था। वह हमेशा कहती थीं जैसा कर्म हम करेंगे, हम देखकर और करेंगे। दादी त्याग-तपस्या की एक प्रतिमूर्ति थीं। इतनी बड़ी संस्था की हैड होने के बाद भी उनको कभी हेडक नहीं होती थी। वह कहती थी कि मैं स्वयं को कभी हेड समझती ही नहीं। हैड समझने से हेडक होती है।

दादी के सानिध्य में वटवृक्ष बनी संस्था
दादी जी के कुशल प्रबंधन, नेतृत्व, त्याग और मेहनत से संस्था प्रगति-पथ पर निरंतर आगे बढ़ती गई और नए-नए कीर्तिमान स्थापित करती गई। वर्ष 1969 में संस्था के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद दादी ने इसकी बागडोर संभाली। दादी के सानिध्य में ही आध्यात्म और राजयोग मेडिटेशन का संदेश विश्व के 142 देशों में तक पहुंचा और एक नन्हा से पौधे ने वटवृक्ष का रूप ले लिया। विश्वभर में 8 हजार से अधिक सेवाकेंद्र का संचालन शुरू किया गया। जिसके फलस्वरूप प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय को संयुक्त राष्ट्र संघ ने गैर सरकारी संस्था के तौर पर आर्थिक एवं सामाजिक परिषद का परामर्शक सदस्य बनाया जो कि यूनिसेफ से भी सम्बद्ध है। साथ ही सात पीस मैसेंजर अवार्ड से भी संस्था को नवाजा गया।

1922 में हैदराबाद (सिंध) में हुआ था जन्म…
दादी का जन्म 1922 को हैदराबाद (सिंध) में एक बड़े ज्योतिषी के घर हुआ। दादी प्रकाशमणिजी का बचपन का नाम रमा था। 14 वर्ष की आयु में वर्ष 1936 में ब्रह्माकुमारी•ा के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा के संपर्क में आईं और उन्होंने उसी समय यह निर्णय कर लिया कि अब हमारा जीवन सद्गुणों से युक्त ईश्वरीय सेवा के लिए रहेगा। तरुण अवस्था में रमा की लगन, निष्ठा, प्रतिभा और दिव्यता की आभा को देखते हुए ब्रह्मा बाबा ने उनका नाम रमा से बदल प्रकाशमणि रखा। दादी जी लाखों लोगों की रूहानी सेना तैयार कर खुद फरिश्ता बन गई और 25 अगस्त, 2007 को इस दुनिया से विदा हो गई।

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दादी प्रकाशमणि चौथी इंटरनेशनल हॉफ मैराथन…
अरावली की हसीन वादियों में विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर दौड़े धावक

– पुरुष वर्ग में मध्यप्रदेश राजगढ़ के विष्णु राठौड़ ने एक घंटा 22 मिनट में प्रथम और महिला वर्ग में उत्तरप्रदेश की अर्पिता सैनी ने एक घंटा 45 में दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान पाया
– शंखनाद के साथ शुरू हुई मैराथन
– एथलीट ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजली देकर शुरू की दौड़
– एशियन गोल्ड चैंपियन सुनीता गोधारा ने बढ़ाया प्रतिभागियों का उत्साह

फैक्ट फाइल…
1800 रनर्स ने कराया था रजिस्ट्रेशन
1500 रनर्स ने लिया मैराथन में भाग
20 से अधिक स्थानों पर की गई रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था
04 देशों के एथलीट ने लिया भाग
18 साल के किशोर से लेकर 65 साल के बुजुर्गों ने भी लिया भाग
03 घंटे में तय करना थी 21.5 किमी की दूरी

19 अगस्त, आबू रोड।

अलसुबह का खुशनुमा मौसम, ओम शांति की मंगलध्वनि, तालियों की गडग़ड़ाहट, शंखध्वनि के बीच विश्व बंधुत्व की मंगल कामना को लेकर धावकों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ दौड़ की शुरुआत की। मौका था ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि की स्मृति में रविवार को आयोजित चौथी इंटरनेशनल हॉफ मैराथन का। भारत सहित विश्व के कई देशों से पधारे धावकों में मैराथन को लेकर उत्साह इतना था कि सुबह 5 बजे से ही जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। इस मैराथन की खासीयत यह रही कि इसमें 18 वर्ष से लेकर 65 वर्ष और डॉक्टर से लेकर इंजीनियर रनर्स ने भाग लिया। वहीं केन्या, स्पेन, इसूपिया सहित अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में रनर्स भाग लेने पहुंचे। शुरुआत में सभी रनर्स सहित अतिथियों ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी।

वार्मअप के बाद सुबह 6 बजे एशियन गोल्ड चैंपियन व कोच सुनीता गोधारा, भारतीय क्रिकेट के खिलाड़ी रहे पूर्व क्रिकेटर नयन मोगिया, सुप्रसिद्ध एथलिट अंजू ठामले सहित अन्य एथलीट ने मशान दिखाकर मैराथन की मंगल शुरुआत की। अतिथियों ने प्रतिभागियों को जैसे ही मशाल दिखाई तो सबका उत्साह देखते ही बन रहा है। सभी भारत माता की जय, वंदे मातरम् और ओम शांति के जयकारे लगाते हुए कदम से कदम बढ़ाते पूरे उमंग-उत्साह के साथ दौड़ पड़े। शुरु से लेकर अंत तक रनर्स में एक-दूसरे से आगे बढऩे की होड़ लगी है।

इन्होंने मारी बाजी
21.097 किलोमीटर की हॉफ मैराथन के पुरुष वर्ग में मध्यप्रदेश राजगढ़ के विष्णु राठौड़ ने एक घंटा 22 मिनट में प्रथम, केन्या के साइमन ने एक घंटा 23 मिनट में द्वितीय, उत्तराखंड के जसविंद सिंह ने एक घंटा 24 मिनट में तृतीय व महिला वर्ग में उत्तरप्रदेश की अर्पिता सैनी ने एक घंटा 45 में प्रथम, इथोपिया की इताफेराहू डुबाले ने 1 घंटा 46 मिनट में द्वितीय, दिल्ली की सीमा सिंह ने एक घंटा 49 मिनट में मैराथन पूरी तृतीय स्थान प्राप्त किया।

20 से अधिक रिफ्रेशमेंट पाइंट बनाए…
मनमोहिनी वन से माउंट आबू के पांडव भवत तक मैराथन में भाग लेने वाले धावकों को 20 से अधिक स्थानों पर रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई थी। इसमें धावकों के लिए पानी, नींबू पानी, ग्लूकोज, एनर्जी ड्रिंक, नाश्ता, फल आदि बांटे गए। साथ ही इस दौरान रिफ्रेशमेंट पाइंट पर मौजूद भाई-बहनों ने गीतों के माध्यम से सभी का उत्साह बढ़ाया।

चंदन का तिलक लगाकर किया स्वागत…
प्रतियोगिता की शुरुआत में ब्रह्माकुमारी बहनों ने सभी प्रतिभागियों को चंदन का तिलक लगाकर स्वागत किया। साथ ही सभी को संस्थान के भाई-बहनों ने उत्साह से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। वहीं पुष्पवर्षा कर सभी को रवाना किया गया। वहीं कोच के रूप में सुनीता गोधारा ने सभी का उत्साहवर्धन करते हुए मैराथन में फस्र्ट आने के टिप्स बताए।

विश्व बंधुत्व के लिए दौड़, अच्छा संदेश
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर नयन मोगिया ने कहा कि विश्व बंधुत्व के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय मैराथन बहुत कम ही देखने को मिलता है। उसमें भी सुन्दर मौसम और हसीन वादियों के बीच धावकों का मनोबल बढ़ेगा और विश्व बन्धुत्व के साथ सेहत भी बेहतर बनाने का संदेश जाएगा। सुप्रसिद्ध एथलिट अंजू ठामले ने कहा ज्यादा से ज्यादा लोगों के शामिल करने से लोगों का उत्साहवर्धन होगा। यूआईटी चेयरमैन सुरेश कोठारी, माउंट आबू पालिका चेयरमैन सुरेश थिंगर, आबू रोड पालिका चेयरमैन सुरेश सिंदल ने भी अपनी शुभकामनाएं दीं।

ये भी रहे उपस्थित…
मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष बीके करुणा, सोशल एक्टीविटी गु्रप के अध्यक्ष बीके भरत, ज्ञानामृत के प्रधान संपादक बीके आत्म प्रकाश, मेडिकल विंग के कार्यकारी सचिव बीके बनारसी लाल शाह, राजयोग शिक्षिका बीके गीता, सीए ललित, बीके मोहन, बीके भानू, बीके देव, बीके रामसुख मिश्रा, पीआरओ बीके कोमल, बीके धीरज, बीके सचिन, बीके रुपा, बीके चंदा, बीके कृष्णा, अनूप सिंह, बीके अमरदीप सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

मैराथन की झलकियां…

– 18 से लेकर 65 साल के बुजुर्ग मैराथन में रहे विशेष आकर्षण
– डॉक्टर्स ने भी स्वास्थ्य का संदेश देते हुए लगाई दौड़
– बारिश भी प्रतिभागियों का कम नहीं कर पाई उत्साह
– युवा बहनों ने उत्साह के साथ तीन घंटे में पूरी की दौड़
– माउंट आबू में तालिया बजाकर स्कूली बच्चियों ने किया रनर्स का स्वागत
– रास्तेभर पूरे जोश और उत्साह के साथ आगे बढ़े प्रतिभागी
– वानरों ने भी प्रतिभागियों को दौड़ते देख लगाई दौड़
– गीतों के माध्यम से बढ़ाया सभी का हौसला
– पीछे रहने के बाद भी कई प्रतिभागी अंत तक दौड़ते रहे
– माउंट में अतिथियों ने मेडल पहनाकर किया सम्मानित

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