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धर्म-कर्म जीवन के अभिन्न अंग
ज्ञान सरोवर में राष्ट्रीय धार्मिक सम्मेलन का उदघाटन

माउंट आबू,२२जुलाई। वृन्दावन गीता आश्रम के स्वामी डॉ. अमरीश चेतन ब्रह्मचारी ने कहा कि धर्म-कर्म जीवन के अभिन्न अंग हैं। ब्रह्माकुमारी संगठन स्वयं के जीवन की ज्योति प्रकाशित करने के साथ विश्व स्तर पर जनहित कार्यों को मूर्तरूप देने में समर्थ है। वे शनिवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ज्ञान सरोवर में अकादमी परिसर में धाॢमक सेवा प्रभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।


पटियाला से आए श्रीश्री १०८आचार्य अरविंद मुनि ने कहा कि धर्मगं्रथ मानव को सत्य व अहिंसा की शिक्षा देते है लेकिन उन शिक्षाओं को मन की भूमि पर अंकुरित करने के लिए शिव परमात्मा से संबंध जोडऩा जरूरी है।

ज्ञान सरोवर निदेशिका राजयोगिनी डॉ. निर्मला ने कहा कि अविनाशरी सुख, शान्ति के लिए अविनाशी सत्ता अर्थात् आत्मा व परमात्मा की सत्यता को जानना जरूरी है। भौतिक साधनों से अल्पकाल का सुख प्राप्त होता है।

भरतपुर सिद्वपीठ पीठाधीश्वर डॉ. कौशल किशोर महाराज ने कहा कि मानवीय चरित्र निर्माण करना सबसे पुण्य का कार्य है। अनावश्यक संस्कारों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए राजयोग का नियमित अभ्यास बेहतर उपाय है।

औरंगाबाद प्रज्ञा प्रसार धम्म संस्कार केंद्र अध्यक्ष भिक्खू विशूदानंद बोधी महाथेरा ने कहा कि आधुनिकता के प्रभाव से डगमगाती अध्यात्मिकता को संबल देने का अदभुत उदाहरण ब्रह्माकुमारी संगठन की ओर से विश्व में शान्ति स्थापन करने का कार्य सबके समक्ष है। मनुष्य के मन पर दैहिकधर्मों का पर्दा पडऩे से नैतिक मूल्यों का उल्लंघन हो रहा है। अब समय आ गया है कि विश्व के सभी धर्म अपने निजी स्वधर्म को पहचानकर एकजुट हो जाएं।

राष्ट्रीय सिक्ख संघ सचिव रघुवीर सिंह ने कहा कि विश्व में फैले अनेक धर्मों को एक मंच पर एकत्रित कर परिवार की तरह जोडऩे का ब्रह्माकुमारी संगठन ने जो कार्य किया है वह अद्वितीय है।

ब्रह्मकुमारी संगठन अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन ने कहा कि धनसंग्रह से भौतिक सुख प्राप्त हो सकता है लेकिन स्थाई सुख शांति के लिए स्वयं के असितत्व का प्रकाश होना चाहिए।

गुजरात बिलीमोरा से आई ब्रह्मवाहिनी सुश्री हेतल दीदी ने कहा कि राजयोग का अभ्यास जीवन मूल्यों में निखार लाने के साथ कर्मों को श्रेष्ठ बनाता है। शिव परमात्मा से योग लगाने से ही आत्मा पावन बनती है।

प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके मनोरमा बहन ने कहा किज्ञान एक प्रकाश है जो मन के सभी प्रकार के अंधकार को समाप्त कर जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है।w

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जीवन में सम्पूर्ण सुख के लिए भौतिकता के साथ आध्यात्मिक समावेश जरूरी – दादी जानकी
वैज्ञानिक एवं अभियन्ताओं के सम्मेलन में जुटे प्रतिभागी

आबू रोड: 5 नवम्बर, निसं। मनुष्य अपने जीवन में सुख और शांति के लिए भौतिक विकास के लिए पूरा जीवन बीता देता है। परन्तु यदि जीवन में सम्पूर्ण सुख चाहिए तो वैज्ञानिक आधार पर भौतिक विकास में आध्यात्मिकता का समावेश जरूरी है। इसके बिना विकास तो होगा परन्तु सुख और आनन्द का हमेशा अभाव रहेगा। उक्त उदगार ब्रह्माकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी ने व्यक्त किये। वे वैज्ञानिक एवं अभियन्ता प्रभाग द्वारा शांतिवन में आयोजित ‘वाह जिन्दगी वाह’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में बोल रही थी।
दादी ने सम्मेलन में सहभागियों से आह्वान किया कि मौजूदा समय में विज्ञान के साथ अध्यात्म को साथ लेकर चलें। पिछले कुछ वर्षों में आध्यात्मिकता और योग के प्रति लोगों का रूझान बढ़ा है। मनुष्य की वाह जिन्दगी वाह तभी हो सकती है जब वह आध्यात्मिकता और राजयोग को जीवन में शामिल करेगा।
नेपाल के शहरी विकास एवं भवन निर्माण विभाग के उपमहानिदेशक मोनी राम गेलाल ने कहा कि भारत और नेपाल एक आध्यात्मिक देश है। परन्तु यह देखने में आया है कि विश्व के कई देशों में विकास तो हुआ परन्तु मानवीय मूल्यों का अकाल दुख दायी रहा है। इसलिए आध्यात्मिकता को साथ रखना जरूरी है। आपातकाल प्रबन्धन संस्थान भोपाल के निदेशक डा0 राकेश दुबे ने कहा आपात काल की स्थिति को समाधान के लिए आन्तरिक आध्यात्मिक विकास की आवश्यकता है। बाद में तो सारी चीजे अपने आप ही मैनेज में हो जाती है।
ब्रह्माकुमारीज संस्था के महासचिव बीके निर्वेर ने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म के सहयोग से ही मनुष्य की वाह वाह जिन्दगी बन सकती है। अध्यात्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है। आज पूरे विश्व में जिस तरह से तेजी से विकास हुआ है, यह जरूरी है परन्तु आध्यात्मिकता के बिना मूल्यों की कमी मानव समाज को विनाश की ओर ढकेल रही है। शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव सम्भू केसी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान जिस राजयोग की शिक्षा दे रही है वह केवल विज्ञान ही नहीं बल्कि सभी वर्गों के लोगों के लिए जरूरी है। यह सम्मेलन कई मायनों में अहम होगा।

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चारो ओर शांती …..शांती मे कानोंतक आनेवाली एक आवाज …..मै आत्मा, देह और देह कि दुनिया से परे, बुद्धियोग बल से अपने असली घर शांतीधाम, परमधाम की यात्रा पर जा रही हू …..अपने प्यारे पिता के सम्मुख बैठ, निज स्वरूप शांती कि अनुभूती कर रही हू…..पुरे २०मि. शांती मे कानो तक आनेवाले इन स्वरो ने जैसे हजारो लोगो के मन को वश कर लिया था . भीड के बीच मे भी एकांत मे जाकर मेडिटेशन का अनुभव करने वाले लोगो के चेहरे पर सात्विक भाव दिखने लगे थे . आवाज रुक गाई और एक ही उत्साह सभी के चेहरो पर दिखाई दिया . मा.आबू स्थित प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के कोल्हापूर सेवाकेंद्र के ४०वे वर्धापन दिवस के निमित्य आयोजित ‘मास मेडिटेशन’ मे पुरे २६,४३५ लोग सहभागी हुये . इस अनोखे कार्यक्रम कि ‘एशिया बुक ऑफ रेकॉर्ड्स’ मे नुंध होने कि घोषणा कि गइ . इसके बाद गांधी मैदान के कोने कोने मे तालीयो कि गुंज के साथ आनंदोत्सव मनाया गया  More …..

भौतिक, आर्थिक के साथ सांस्कृतिक तरक्की की जरूरत- कोहली देशभर के शिक्षाविद उच्च माध्यमिक शिक्षकों के अधिवेशन में जुटे आबू रोड, 20 मई, निसं। आज हम दो राहे पर खड़े हैं। एक तरफ भौतिक और आर्थिक तरक्की है तो दूसरी ओर सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास। कई बार ऐसा लगता है कि कहीं हम भौतिक तथा आर्थिक तरक्की में सांस्कृतिक तरक्की कहीं भूल ना जायें। इसलिए भौतिक और आर्थिक तरक्की के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक तरक्की की जरूरत है। उक्त उदगार गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली ने व्यक्त किये। वे ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन में उच्च माध्यमिक शिक्षकों के अधिवेशन में जुटे देशभर के हजारों शिक्षाविदों को सबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सिर्फ रोजगार का अवसर पैदा करना या दिलाना ही केवल शिक्षा का स्तर नहीं होना चाहिए। बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के तहत एक ऐसे व्यक्ति का निर्माण भी होना चाहिए जो आज के समय के लिए जरूरत है। केवल शब्द का ज्ञान प्राप्त करना ही शिक्षा का मकसद नहीं होना चाहिए। शिक्षा का मतलत सर्वागिण विकास। जिसमें मूल्यों के साथ सामाजिक सदभाव और समरसता का भी विकास हो। दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति वा मनुष्य ऐसे गुणों से परिपूर्ण हो जिससे उसकी उपयोगिता समाज के विकास के लिए बढ़ जाये। आज हम केवल अपने देश को विकसित देशों की श्रेणी में देखना चाहते है। यह जरूरी है परन्तु सांस्कृतिक विरासत भी होनी चाहिए जिससे एक अच्छा समाज बने। ब्रह्माकुमारीज संस्थान आज पूरी दुनिया में मूल्यों के अपनाने की जो शिक्षा दे रही है वह वाकई में काबिले तारीफ है। यहॉं की व्यवस्था देखने के बाद सहज ही महसूस होने लगता है।

ब्रह्माकुमारीज संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि संस्थान का प्रयास एक ऐसा समाज बनाना है जिससे प्रत्येक मुनष्य के अन्दर श्रेष्ठ और सुन्दर गुणों की पराकाष्ठा हो। परमात्मा शिव ने जो शिक्षा दी वह प्रत्येक मनुष्य के लिए जरूरी है। यदि हम इसे जीवन में उतारने का प्रयास करें तो निश्वित तौर पर हमारा देश महान बन जायेगा। शिक्षा प्रभाग के उपाध्यक्ष बीके मृत्युंजय ने कहा कि आज मूल्य आधारित शिक्षा की मांग बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि भारत के दस विश्वविद्यालयों में संस्थान द्वारा बनायी गयी मूल्य आधारित शिक्षा पाठयक्रम को पढ़ाया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि सभी विश्वविद्यालयों एवं कालेजों में यह शिक्षा लागू कर दी जाये।    

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The government here has been taking care of the basic relief measures after the cyclone to provide the essential commodities to the people in the city. As observed, one of the prominent after-effects of the cyclone in the city is water pollution which is increasing day after day leading to an increase in the number of water-borne diseases. Taking this into consideration, Baba’s children here, with the support of Greater Visakhapatnam Municipal Corporation are carrying out relief activities to promote awareness on the hygiene to be maintained and the precautions to be taken to avoid contagious diseases like conjuctivits.

We have adopted a few areas near the centre and are going from door to door spreading the message of hygiene by distributing pamphlets. We are giving chlorine tablets for purification of the water at homes. Bleaching powder and other disinfectants are being poured near the garbage bins. Also, we are trying to convince the members of the localities not to fire crackers on this Diwali by explaining them the harmful consequences of lighting fire at this time when there is a lot of dry wood lying all around.

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