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जीवन में सफलता के लिए प्रभु का साथ चाहिए : राजयोगिनी नलिनी दीदी

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ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),०५ अगस्त , २०१६। आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था , पोत परिवहन , वैमानिकी और पर्यटन प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था – ” शांति और विकास की यात्रा -एकता और अनेकता की ओर ” . इस सम्मलेन में भारत के विभिन्न प्रान्तों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का उद्घाटन सम्पन्न हुआ।

आज के कार्य क्रम की अध्यक्षा राजयोगिनी नलिनी दीदी ने आपना आशीर्वचन इन शब्दों में दिया। आपने कहा कि इस स्थान पर आध्यात्मिकता और भौतिकता का समन्वय है। हम सभी दुनिया में मुसाफिर हैं। मुसाफिरों का घर कहीं और होता है। हम इस रंगमंच पर अपनी अपनी भूमिका का पालन कर रहे हैं। मगर कभी न कभी हमें अपने घर वापस जाना ही है। अपनी भूमिका सम्पन्न करके हम शांत हो जाते हैं। अर्थात मौत का सामना करते हैं। जन्म से मौत तक हमारा सफर जारी रहता है।

अपने अपने कार्य क्षेत्र में हमारे सामने दिक्कतें आती हैं जो हमारी परीक्षा लेती हैं। हमें उनसे जूझना होता है। हम सफलता के लिए शोध करते रहते हैं। उस शोध के लिए एकांत , श्रम ,त्याग ,शांति आदि आदि की आवश्यकता होती है। शोधार्ती कहीं न कहीं तब सफल हुआ जब वे उस अदृश्य सत्ता से जुड़े।
तभी सफलता मिली। जीवन में सफलता के लिए प्रभु का साथ जरूर चाहिए। जीवन का सफर भी उनकी मदद से ही अंजाम तक पहुचेगा।

राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी मीरा दीदी , पोत परिवहन , वैमानिकी और पर्यटन प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका हैं। उक्त अवसर पर आपने कहा कि यहां पहुचने वाले आप सभी लकी हैं। सम्मलेन का लाभ प्राप्त करें।
पर्यटन अनेक कारणों से समपन्न होता है। इसका लाभ भी काफी होता है। टैगोर के अनुसार पर्यटन से लोगों को असीम लाभ मिलता है। दृष्टिकोण बदल जाता है। दुनिया के लिए मन में प्रेम प्रकट होता है।
हम सभी जन्म से ही यात्री हैं और जीवन यात्रा में आगे बढ़ रहे हैं। अगर हमारा लक्ष्य साफ़ हो तो हम सफल भी होते हैं। सफर में आने वाली चुनौतियां तब समाप्त होती हैं जब हम दृढ़ता और शांति से उनका सामना करते हैं। शांति हमारा अपना चॉइस है। अगर हम शांति को अपनाना चाहे तो आसानी से अपना सकते हैं। अतः शांति के ख़ज़ाने को जरूर साथ लेकर जाएँ।

सतीश सोनी भाई जी , महाराष्ट्र शासन में पर्यटन प्रभाग के निदेशक ने आज उद्घाटन भाषण दिया। आपने कहा कि यहां आने पर एक अलग ही अनुभव होता है। यहां आकर मैंने अपनी प्रतिबद्धता पूरी की। प्रतिबद्धता पूरी करने के बारे में भी मैंने यहां से ही सीखा है। पर्यटन काफी काफी महत्व पूर्ण है। भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या जल्दी ही एक बिलियन होने वाला है। इससे हमारे देश का विकास होगा। सरकारें इसके लिए प्रयास कर रही हैं। पर्यटन को बढ़ाने में स्वच्छता अभियान का बड़ा योगदान है। अपने देश की सेवा के लिए हमें स्वच्छता अभियान को दिल से अपनाना चाहिए।
ब्रह्मा कुमारियाँ ,मानव समुदाय को एक आध्यात्मिक सफर पर लेकर जाती हैं। यह एक विशेष बात है।

दिल्ली विमानपत्तन प्राधिकार के वित्त निदेशक जी डी गुप्ता , ने कहा कि पर्यटन से सम्बद्ध लोग तनाव ग्रस्त होते हैं। ध्यान के अभ्यास से इसमें कमी आयी हैं। ब्रह्मा कुमारिया इस कार्य में निष्णात हैं और तेजी से ध्यान का प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं।

मुम्बई के प्रख्यात पर्यटन आयोजक कमल आर वाधवानी जी ने अपनी शुभ कामनाएं दी। तनाव ग्रस्त लोगों की शांति के लिए यह स्थान स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आने से ही जीवन में शांति आती है। ध्यान का अभ्यास सभी को अपनाना ही होगा।

प्रभाग की मुख्यालय संयोजिका राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी सुमन ने आये हुए सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। कहा कि आप सभी यहां आतंरिक शांति की तलाश में आये हैं। यहां आपका समय एक यादगार बनेगा -ऐसा मेरा पूरा विश्वास है। निवेदन है की आप यहां प्रत्येक व्याख्यान सुनें। मिस न करें। सभी व्याख्यान अद्भुत होते हैं। ज्ञान सरोवर -मान सरोवर है जहां जन्म जन्मातर के पाप धुल जाते हैं।

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ओमशान्ति के अर्थ में समा कर शान्ति की अनुभूति करने वाले ही बनेगे देवी-देवता’’- दादी हृदयमोहिनी
 
नई दिल्ली, 25 जुलाईः प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा कल शाम स्थानीय तालकटोरा स्टेडियम में ’’सुखमय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण रहस्योद्घाटन’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें निकट भविष्य में विश्व के महापरिवर्तन के पश्चात स्वर्णिम भारत किसके लिए आयेगा और कौन बनेगा वहां देवी-देवता का रहस्योद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षा ब्रह्माकुमारी संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी ने अपने आर्शिवचन में कहा कि ओमशान्ति कहने से ही मन शान्त हो जाता है। ओमशान्ति के अर्थ अर्थात इस शरीर को चलाने वाली शक्ति मैं आत्मा हँू और आत्मा का स्वरूप शान्ति है को समझकर इसमें समा जाने से ही जीवन में शान्ति की अनुभूति होगी और जो इस अनुभूति को प्रतिदिन जीवन में प्रत्येक कर्म में अनुभव करेगा वही बनेगा आने वाली स्वर्णिम दुनिया का देवी-देवता।
ब्रह्माकुमारी संस्था के मुख्य प्रवक्ता ब्र0कु0 बृजमोहन जी ने वर्तमान समय को विश्व के महापरिवर्तन का समय बताते हुए कहा कि दुनिया की हर चीज पहले शुरू होती है अथवा नई होती है फिर धीरे धीरे पुरानी होती है और हर चीज की पुराना होने की एक सीमा होती है जिसके पश्चात उसका परिवर्तन होना निश्चित है। उन्होंने कहा जो चीज सदा रहती है वह च्रक के रूप में होती है और उसके दो बिन्दु होते है आपस में संगम के चाहे वह दिन-रात हो, सप्ताह हो, वर्ष हो। इसी प्रकार इस बेहद के नाटक का चक्र है जो नया होने पर सतयुग से लेकर पुराना होकर कलयुग के अन्त पर पहुँच गया है। और वह बिन्दु आ गया है जब पुराने कलयुग का अन्त हो फिर से नये सतयुग की शुरूआत होगी जिसे ही महापरिवर्तन कहा जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि बाकी युगों के परिवर्तन में चाहे वह सतयुग से त्रेतायुग हो या त्रेतायुग से द्वापरयुग हो या द्वापरयुग से कलयुग हो नये युग में आने वाले के साथ पुराने युग के भी लोग होते है जिससे आबादी बढ़ती जाती है। परन्तु इस महापरिवर्तन में अर्थात कलयुग से सतयुग के परिवर्तन में केवल वे लोग ही चल सकेगें जो परमात्मा को पहचान कर उससे सम्बन्ध जोड़ेगे क्योकि परमात्मा स्वर्ग का रचयिता है।
उन्होनें कलियुग और सतयुग मंे अन्तर स्पष्ट करते हुए बताया कि कलयुग में किसी भी व्यक्ति के साथ कभी भी  कुछ भी हो सकता है जबकि सतयुग में हर चीज ठीक समय पर ठीक स्थान पर मर्यादा से होती है।

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सेन्ट्रल ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन के तरफ से ब्रह्मकुमारी त्रिवेणी बहेन को ‘मानव अधिकार रत्न पुरस्कार’ से भ्राता मिलिंद दहिवले जी (संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष , केंद्रीय मानव अधिकार संघटन ISO ९००१:२००८ सर्टिफाइड आर्गेनाईजेशन ) ने सन्मानित किया। साथ ही केंद्रीय मानव अधिकार संघटन द्वारा ब्रह्मकुमारी त्रिवेणी बहन को ‘राष्ट्रीय महासचिव (महिला प्रकल्प)’ के पद पर नियुक्त किया गया है।

Rajyogi B.K. Nirwair Bhai, Secretary General of Brahma Kumaris has been conferred “Bharat Gaurav – Lifetime Achievement Award” on 2nd July 2016 in a grand ceremony held at House of Commons (British Parliament), London (UK) in the presence of dignitaries from all over the world.  On his behalf  BK Bharat from institution’s head office Mount Abu received the award.

The award was presented by Parliamentary under Secretary of State for International Development and Member of House of Lords Baroness Sandip Verma and Sanskriti Yuva Sansthan chairman Suresh Sharma. The award was presented to people who have achieved extraordinary excellence in their fields and have made India feel proud of them by Sanskriti Yuva Sansthan, an international NGO working for rise of Indian Culture.

This award was given to BK Nirwair Bhai for his unparalleled contribution in spreading Indian spirituality, Rajyoga mediation and human values throughout the world.

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मूल्यों को धारण करके समाज को स्वस्थ और सुखी बना सकेंगे : राजयोगिनी चक्रधारी दीदी

ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),02 जुलाई २०१६। आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था , महिला प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था -” स्वस्थ और सुखी समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका ” . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का उद्घाटन सम्पन्न हुआ।

ब्रह्मा कुमारीज महिला प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी चक्रधारी दीदी ने कार्य क्रम में अपना अध्यक्षीय उद्बोधन दिया . आपने कहा कि हम सभी आत्माएं हैं . चैतन्य शक्ति आत्माएं . आध्यात्मिकता से जुड़ने की यह पहली शर्त है.
हमें यह जानने का प्रयत्न करना चाहिए की कभी संसार में स्वस्थ और सुखी समाज था ? हम जानते हैं की कभी भारत सोने की चिड़िया था . तब बाघ और बकरी एक ही घाट पर पानी पीते थे . सोचिये की तब का इंसान कैसा रहा होगा ?
वो थी देवभूमि . तब देवी देवताओं समान इंसान थे . समाज स्वस्थ था -सुखी था .
प्रकृति और पुरुष का यह खेल है . प्रकृति हमारा तन है जो प्रकृति में ही मिल जाता है . पुरुष यानि आत्मा अजर अमर है . इसकी ही मुख्य भूमिका है . खुद को अभिनेता मान कर – स्त्री पुरुष नहीं – अपनी भूमिका का निर्वाह करने से जीवन मूल्य वान बनता है और संसार देवभूमि . आज के संसार को भी हम स्वस्थ और सुखमय बना सकेंगे – मूल्यों को आत्मा में भर कर . आत्मिक भान से परमात्मा से युक्त होकर उनसे दिव्यता प्राप्त करके सम्पूर्णता धारण करके -जीवन को सफल बना सकेंगे .

मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती लता वानखेड़े ने आज का उद्घाटन भाषण प्रस्तुत किया . आपने कहा कि नारी शक्ति से ये जहान है और नारी शक्ति से सुसज्जित हिन्दुस्तान है . ब्रह्मा कुमारीज इस कलियुग में सतयुगी शिक्षाएं दे रही हैं . इनका प्रयास महान है . यह एक विराट संस्थान है . इनके अभियान के प्रति मैं नत मस्तक हूँ . नारी हर तरह से महान है . दुनिया में इनका कोई मुक़ाबला नहीं है . समाज के हर विभाग में आज वो आगे ही आगे है .
मगर सामजिक कुरीतियों ने महिलाओं को दुखो में झोंका है . उनको आगे लाने के लिए हम सभी महिलाओं को तन मन से आगे आकर उनकी मदद करनी होगी . राष्ट्र हित के लिए हम नारियों को दुर्गा ,काली , कल्पना चावला बन कर दुनिया को दिशा देनी है . हम सभी संकल्प लें की जन जन में फ़ैली कुरीतियों को समाप्त कर नारियों को विश्व मंच पर लाएंगी .

झारखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा डॉक्टर महुआ मोजी ने मुख्य अतिथि की भूमिका में अपना वक्तव्य दिया . आपने कहा कि मैं संस्था की आभारी हूँ . यहां मैंने परम शांति का अनुभव किया है . संसार आज शांति के लिए भटक रहा है . सभी को शांति चाहिए . मगर कैसे ? आज हमारा समाज डरा हुआ है . महिलाएं हमारे झारखंड की काफी पिछड़ी हुई हैं . अशिक्षित हैं . प्रताड़ित की जा रही हैं . उनको डायन बता कर मारा जा रहा है . माहौल काफी दुखद है . ठगी जा रही हैं भोली महिलाएं .
जड़ में है उनकी अशिक्षा . उनकी कमजोरी . उनको शिक्षित होना होगा . उनको अपना जीवन उत्तम बनाना होगा . तभी हो पाएगा उनका उद्धार . हर वर्ग की महिलाओं को सुसंस्कृत बना कर स्वस्थ और सुखी समाज बनाया जा सकेगा .

अखिल भारतीय महिला लीग , अमदाबाद चैप्टर की अध्यक्षा संजीता सिंह नेगी ने विशिष्ठ अतिथि के बतौर अपना व्याख्यान दिया . कहा कि आज की महिलाएं द्विविधा में ग्रस्त हैं . समझ नहीं पाती की वे देवियां हैं या साधारण महिलाएं . हमें हमारी शक्तियों का पता नहीं . इसकी महसूसता नहीं होती . हमें क्या करना होगा की समाज सुखी और स्वस्थ बने ? हमें पहले अपने अंदर शक्तियों को महसूस करना होगा . आज भी भारत में महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव बना हुआ है . ब्रह्मा कुमारीज हमारे अंदर श्रेष्ठता की भावनाएं भर देती हैं . अपनी दिनचर्या को सुधार कर , अपने को स्वस्थ बना कर हम समाज को सुधार सकेंगी .

वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्मा कुमारी शीलू बहन ने अपना उदगार मुख्य वक्ता के रूप में प्रकट किया . आपने कहा कि आज का हमारा समाज पूरी तरह तनाव ग्रस्त है . यहाँ तक की बच्चे भी तनाव झेल रहे हैं . समाज सुख शांति का जीवन चाहता है मगर वैसा कर पाने में समाज असमर्थ है . अब एक बड़ा प्रश्न है की इन परिस्थितियों के लिए दोषी कौन है ? कहीं न कहीं समाज की ऐसी स्थिति के लिए मेरा अपना भी थोड़ा योगदान तो है ही . अतः मुझे भी अपने आप में सुधार लाना ही होगा .
इसमें कोई शक नहीं की भारत में नारियों का काफी सम्मान है . दुर्गा -काली -सरस्वती आदि आदि देविओं के रूप में इनकी पूजा होती है हर घर में . अगर महिलाएं फिर से अपने जीवन में देवत्व का भाव लाएं तो पूज्य बन सकती हैं . भारत एक बार फिर से स्वर्ग बन सकता है . नारियां मूल्यों को सहज ही अपना सकती हैं . इससे समाज सुखी और स्वस्थ बनेगा .